प्रेरक व्यक्ति

प्रदीप नयाल और अशोक बोरा ने अल्मोड़ा के फालता गांव में खोला मुर्गीपालन का व्यवसाय

हल्द्वानी:कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन लागू हुआ। पूरा देश एक तरह से बंद हो गया । सैंकड़ों लोगों की नौकरी चले गई। कई लोगों का काम बंद हो गया। इस बीच कई आत्महत्या के मामले भी सामने आए। कुछ लोगों ने लॉकडाउन का वक्त अपने ऊपर खर्च किया और आज वह अपने फैसले से खुश हैं। हल्द्वानी पुरानी आईटीआई गौजाजाली निवासी प्रदीप नयाल और अशोक बोरा लॉकडाउन से पहले अपने काम में व्यस्त थे। प्रदीप की एक ट्रैवल एजेंसी है और अशोक दिल्ली की एक कंपनी में थे। दोनों अच्छा कमा रहे थे लेकिन लॉकडाउन ने सभी चीजों को शून्य कर दिया।

अशोक दिल्ली से लौटे और प्रदीप ने उनके साथ खुद का काम शुरू करने का प्रस्ताव रखा। दोनों बचपन के दोस्त हैं तो उन्होंने साथ में काम करने का फैसला किया। काम शुरू करने के लिए उन्होंने अपने पहाड़ जाने का फैसला किया ताकि अपने लोगों को भी रोजगार मिल सके। दोनों ने अल्मोड़ा जिले के फालता गांव में मुर्गीपालन फार्म (poultry farm) खोला। लॉकडाउन के बाद इस क्षेत्र में काम कैसे किया जाए दोनों ने रिसर्च किया। इसके बाद मई में 40 पक्षियों के साथ काम को शुरू किया। उनकी मेहनत का नतीजा है कि अब फार्म में 600 पक्षी हो गए हैं। इस लिस्ट में कडकनाथ, वनाराज और रीर प्रजाति के मुर्गे हैं।

इस बारे में प्रदीप और अशोक का कहना है कि मुर्गीपालन का काम शुरू करने का फैसला ठीक रहा। इस पर काफी रिसर्च की थी। सबसे अच्छा रहा कि परिवार से सपोर्ट भी मिला। जिस तरह दूसरे राज्यों के लोग लॉकडाउन में घर आए , वह एक दुखद अनुभव था। इसलिए हमें लगा कि ऐसा काम खोलेंगे जिसमें स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिले और उन्हें अपना घर छोड़कर दूसरे शहर ना जाना पड़े। कुछ महीने पहले ही काम शुरू हुआ लेकिन गांव के 5 युवा हमारे साथ हैं। हमें उम्मीद है कि पर्वतीय क्षेत्र में अधिक से अधिक लोग अपना काम शुरू करेंगे ताकि पलायन की समस्या का भी हल निकल पाए। आमदनी कम भी हो तो चलेगा लेकिन हम अगर अधिक से अधिक लोगों को रोजगार दे पाए तो वही हमारी कामयाबी होगी। प्रदीप ने बताया कि खरीद के लिए भी अपनी विंडो को खोल दिया है।

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