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थलीसैंण ब्लॉक के कई गांवों में अज्ञात रोग से ‘तबाह’ हो रही आलू की फसल

पौड़ी जिले के एक दर्जन से अधिक गांवों में आलू की फसल पर खतरा मंडराने लगा है. आलू की फसल में अज्ञात रोग लग गया है, जिससे आलू की पौधों की जड़ें सड़ने लगी हैं. ऐसे में काश्तकारों के सामने संकट गहराने लगा है. काश्तकार भी हैरान हैं कि आखिर आलू के पौधों की जड़ें सड़ क्यों रही हैं. कई कोशिशों के बाद भी काश्तकार फसल को बचाने में असमर्थ हो रहे हैं.

बता दें, पहाड़ी आलू अपने स्वाद और पौष्टिकता के लिए भी खूब पसंद किया जाता है. यही वजह है कि पहाड़ी आलू की बाजार में काफी मांग भी रहती है लेकिन इस बार पौड़ी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आलू के फसल पर अज्ञात बीमारी लग गई, जिसके चलते काश्तकार काफी परेशान हैं. प्रगतिशील काश्तकार जगमोहन डांगी ने बताया कि ब्लॉक के थनुल, कुनकली, किसमोलिया, भेटली, पलासू, जखनोली, उजेडगांव, भटकोटी, अलासू और जखनोली आदि गांवों के काश्तकार परेशान हैं.

दैनिक आहार में आलू का महत्व: आलू में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन एवं खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाये जातें हैं. इस प्रकार प्रति 100 ग्राम खाने योग्य आलू के भाग में प्रमुख पौष्टिक तत्वों की मात्रा में कार्बोहाइड्रेट 22.9 ग्राम, प्रोटीन 1.6 ग्राम, विटामिन ‘ए’ 24.0 मिग्रा, विटामिन ‘बी’ 17.0 मिग्रा विटामिन ‘सी’ 0.11 मिग्रा, ऊर्जा 10 कैलोरी एवं खनिज पदार्थ जैसे फास्फोरस 40 मिग्रा लोहा 0.7 मिग्रा तथा पोटैशियम 24.7 मिग्रा मिलता है.

आलू इसलिए है खास: आलू में अनेक उपयोगी गुण हैं. आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन, कैल्शियम, मैगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं. इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी हैं. जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है तो उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है.

चौथा सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता आलू: आज इक्कीसवीं सदी के विश्व में चावल, गेहूं एवं मक्का के बाद आलू सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला चौथा प्रमुख खाद्य फसल बनकर उभरा है. वर्तमान परिदृश्य में कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार विश्व की बढ़ती जनसंख्या को कुपोषण एवं भुखमरी से मुक्ति दिलाने में आलू की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

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