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पोखड़ा स्थित हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी में शिक्षा व्यवस्था चौपट

पोखड़ा: कई उम्मीदों के साथ कुछ वर्ष पूर्व पहाड़ में निवेश के नाम पर सरकारी छूट के तहत संचालित पौड़ी जिले के पोखड़ा में माता मंगला जी, भोले जी महाराज तथा उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के पडोसी गांव में स्थित निजी यूनिवर्सिटी हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी का है। जो कि दिल्ली और गाज़ियाबाद में बैठे मालिकान द्वारा संचालित हो रही है तथा खुले आम उच्च शिक्षा की बदहाली का रोना रो रही है, वैसे भी अब पहाड़ में पलायन के पश्चात बचे -खुचे निर्धन लोग ही रह गए है ये यूनिवर्सिटी उन गरीब बच्चो से मोटी फीस की वसूली कर बिना शिक्षकों के ही छात्रों का भविष्य चौपट कर रही है।सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि यूनिवर्सिटी द्वारा कुछ जिलों में मनमर्जी से स्टडी सेंटर भी ठेके पर दिए गए है।

सरकार लगातार बातें करती है कि पहाड़ों में शिक्षा की व्यवस्था सुधारनी है लेकिन कुछ व्यवसायी हैं, जो सरकार के सपनों पर बट्टा लगा रहे हैं। पहाड़ की ही प्राइवेट यूनिवर्सिटीज पहाड़ के छात्रों और सरकार के सपनों पर बट्टा लगा रही हैं। कई उम्मीदों के साथ पौड़ी जिले के पोखड़ा में हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी 2016 में स्थापित हुई थी। पहाड़ के छात्रों को प्रॉफेशनल एजुकेशन मिल सके इसलिए उस दौरान यूनिवर्सिटी को बड़े उद्देश्य से स्थापित किया गया। लेकिन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के बारे में जो सुनने को मिल रहा है, वो गजब है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि है कि तमाम नियम कायदों को दरकिनार कर सिर्फ अपनी कमाई कर रहा है।

विश्वविद्यालय अपनी मनमर्जी से डिस्टेंस एजुकेशन की तरह काम कर रहा है। विश्वविद्यालय में UGC के नियमों के अनुरूप फैकल्टी नहीं हैं। तथा न ही भवन की व्यवस्था हो पाई है, न ही स्टाफ के लिए रहने की व्यवस्था है।

सूत्रों के मुताबिक उक्त विश्वविद्यालय अपनी सहूलियत के हिसाब से परीक्षा किसी भी केंद्र में आयोजित कर देता है। जानकारी है कि पिछली परीक्षा कोटद्वार में केंद्र बनाकर आयोजित कर दी गई। जो कि नियम विरुद्ध है।

सूत्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय पूरी फीस वसूल करता है और छात्रों की उपस्थिति मनमाने तरीक़े से दर्शाता है।
अगर उक्त सभी बातें सच हैं को सवाल उठने लाज़िमी हैं।

सवाल अभी भी हैं
अगर ये बातें सच हैं तो इस विश्वविद्यालय पर कार्रवाई क्यों नही की जा रही है?
विश्वविद्यालय द्वारा पहाड़ के छात्रों का बड़े संस्थानों में प्लेसमेंट का भी दावा किया गया। सवाल है कि आखिर पिछले 4 सालों में विश्वविद्यालय से कितने छात्रों का प्लेसमेंट हुआ? सवाल तो ये भी है कि क्या सरकार की ही तरफ से इस विश्वविद्यालय को खुली छूट मिली है?

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