नेतागिरी

राजनीत‍िक पंड‍ित मानते हैं क‍ि धन स‍िंंह राजनीत‍िक हुनर के धनी है

उत्‍तराखंड की सक्रि‍य राजनीति‍ (Uttarakhand Active Politics) में धन स‍िंह रावत (Dhan Singh Rawat) का नाम बेशक नया हो, लेक‍िन उत्‍तराखंड की राजनीति‍ में धन स‍िंंह रावत की जड़ें बेहद ही गहरी रही हैं. छोटे कद के धन स‍िंंह रावत ने एक दशक से कम की सक्र‍िय राजनीत‍ि में बड़ा फासला तय क‍िया है. राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ (RSS) से बीजेपी की सक्र‍िय राजनीत‍ि में आए धन स‍िंह रावत का नाम कई बार मुख्‍यमंत्री के संभाव‍ित उम्‍मीदवार के  तौर पर सामने आता रहा है.

हालांक‍ि फि‍लहाल अभी तक उन्‍हें इसमें सफलता नहीं म‍िली है, लेक‍िन राजनीत‍िक पंड‍ित मानते हैं क‍ि धन स‍िंंह राजनीत‍िक हुनर के धनी है, जो एक द‍िन मुख्‍यमंत्री तक का फासला जरूर तय करेंगे. वहीं उनका नाम धन स‍िंह रखे जाने के पीछे भी एक कहानी है. ज‍िसमें उनके नाम का संबंध मनी ऑर्डर से है.

प‍िता का मनी ऑर्डर म‍िलने पर धन स‍िंंह रखा गया नाम

उत्‍तराखंंड के कैब‍िनेट मंत्री धन स‍िंंह रावत ने एक कार्यक्रम में अपना नाम धन स‍िंंह रखे जाने की कहानी साझा की थी. ज‍िसके तहत प‍िता का मनी ऑर्डर म‍िलने पर उनके प‍र‍िवार ने उनका नाम धन स‍िंंह रखा था. धन स‍िंंह ने बताया था क‍ि एक बार उनके प‍िता ने उनकी मां के नाम पर 50 रुपये का मनी ऑर्डर भेजा था, जो उनके जन्‍म द‍िन वाले द‍िन उनकी मां को म‍िला और यहीं से धन स‍िंंह की कहानी शुरू हुई है और उस नवजात का नाम धन स‍िंंह रखा गया.

एबीवीपी से शुरू की राजनीत‍ि पारी, बीजेपी में संगठन मंत्री रहे हैं

धन सिंह रावत का जन्म 7 अक्टूबर सन 1971 में पौड़ी गढ़वाल जिले के ग्राम नौगांव, पट्टी कंडारस्यूं, पोओ डुंगरीखाल हुआ था. वह बचपन से ही समाज सेवा के प्रति समर्पित थे. वहीं धन स‍िंह ने अपने राजनीत‍ि पारी की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से शुरू की है. इसके बाद वह आरएसएस में पूर्णकालीक हो गए. ज‍िसके बाद उन्‍होंने एबीवीपी में प्रदेश मंत्री और प्रदेश संगठन मंत्री के दाय‍ि‍त्‍व न‍िभाया. वह आरएसएस की तरफ से बीजेपी में राज्‍य संगठन मंत्री भी रहे हैं.

पहली बार श्रीनगर से व‍िधायक बने हैं धन स‍िंह रावत

आरएसएस में रहने के दौरान जब वह बीजेपी में संगठन मंत्री रहे तो उसके बाद उन्‍होंंने सक्र‍िय राजनीत‍ि में आने का मन बनाया. बीजेपी की सक्र‍िय राजनीत‍ि में आने के बाद वह उन्‍हें बीजेपी उपाध्यक्ष का पद द‍िया गया. इसके बाद वह 2012 के व‍िधानसभा चुनाव में ट‍िकट मांगते रहे, लेक‍िन उन्‍हें पहली बार 2017 में बीजेपी ने श्रीनगर व‍िधानसभा से ट‍िकट दी. इस चुनाव में वह जीतने में सफल रहे और पहली बार व‍िधायक बने. इसी के साथ ही पहली बार ही वह राज्‍य मंत्री स्‍वतंत्र प्रभार बनाए गए. धन स‍िंंह रावत ने हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल की है. साल 2009 में उन्होंने दीपा रावत से शादी की थी.

कई सामाज‍िक यात्राओं का कर चुके हैं आयोजन, जेल भी जा चुके हैं

धन स‍िंंह रावत अपने जीवनकाल के दौरान अस्पृश्यता निवारण, बाल विवाह, मद्य निषेध जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलंद कर चुके हैं. तो वहीं वह रामजन्म भूमि आंदोलन में भी सक्रिय थे, जिसमें उन्हें जेल भी जाना पड़ा. साथ ही उत्तराखंड को अगल राज्य को दर्जा दिलाने के लिए उन्होंने आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी. इसके ल‍िए उन्हें दो बार जेल जाना पड़ा. धन सिंह ने अपने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ 100 कॉलेजों में 100 पेड़ लगाये. इसके अलावा उत्तरकाशी और चमोली में आए भूंकप में उन्होंने कई महीनों तक गांव-गांव में राहत कार्य किया. इसके साथ ही वह कई सामाज‍िक यात्राएं भी आयोजित कर चुके हैं. ज‍िसके तहत उन्होंने उत्तराखंड राज्य के गठन की मांग को लेकर  59 दिनों की पदायात्रा निकाली थी. यह यात्रा लैंसडाउन से होकर लैंसडाउन वापस आयी. इसके अलावा दूसरी पदयात्रा माओवाद के खिलाफ आयोजि‍त की गई.

विवाद से भी रहा नाता

धन सिंह रावत का विवादों से भी गहरा नाता रहा है. एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर यह कहने के बाद विवादों में आ गए थे कि सरकार बारिश की तीव्रता को नियंत्रित करने के लिए एक ऐप का उपयोग करने के बारे में सोच रही है. इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने चुटकी लेते हुए कहा था कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को भारत रत्न के लिए अपने कैबिनेट मंत्री के नाम का प्रस्ताव देना चाहिए.

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