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ठगी करने वाले पांच आरोपितों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

देहरादून, सस्ते में लोन दिलाने का झांसा देकर करीब तीन सौ लोगों के मेहनत की कमाई डकार कर भागे पांच धोखेबाजों को पुलिस ने मेरठ के खकरौंदा से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस गिरोह के सदस्यों की करीब साढ़े तीन महीने से तलाश कर रही थी। गिरोह के सदस्यों ने जुलाई में प्रवेश विहार में आफिस खोला था, जब करीब तीन सौ लोगों ने ढाई-ढाई हजार रुपये जमा कर लोन के लिए आवेदन कर दिया तो आरोपित आठ अगस्त को आफिस बंद कर फरार हो गए।

करीब साढ़े तीन महीने पहले नेहरू कॉलोनी के प्रवेश विहार स्थित स्वमान फाइनेंशियल प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर पर लोन का आवेदन करने वाले पहुंचे तो वहां ताला लटका देख उनके होश फाख्ता हो गए।

लोगों ने पुलिस को सूचना दी और बताया कि कंपनी में उन्होंने लोन के लिए पंजीकरण कराया था। पंजीकरण की फीस के तौर पर हर व्यक्ति से करीब ढाई हजार रुपये वसूले गए थे।

पुलिस ने कंपनी में काम करने वालों के मोबाइल की सीडीआर और आधार कार्ड की डिटेल निकलवाई तो पता चला कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पांच लोगों ने यहां सोची-समझी साजिश के तहत कंपनी खोली और फिर रकम लेकर फरार हो गए।

एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि मंगलवार को तीन आरोपितों की मेरठ में लोकेशन ट्रेस हो गई। यहां से एसओ नेहरू कॉलोनी दिलबर सिंह नेगी में नेतृत्व में टीम मेरठ रवाना की गई।

वहां खकरौंदा में मंगलवार को राहुल निवासी निरोजपुर गुर्जर थाना व जिला बागपत, दीपक चौधरी व राहुल चौधरी निवासी अमानुल्लाहपुर थाना रोहटा मेरठ को गिरफ्तार किया गया।

तीनों ने पूछताछ में बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड राजू निवासी साल्हापुर थाना नकुड़ सहारनपुर है और उसके साथ वारदात में उसका दोस्त दीपक कुमार निवासी ग्राम सिसौली तहसील बुढ़ाना थाना मोहरा कलां, मुजफ्फरनगर हाल निवासी माजरी माफी मोहकमपुर भी शामिल था।

इन दोनों को पुलिस ने बुधवार को उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों की निशानदेही पर एक लैपटॉप, कंपनी की मोहर व कार्ड समेत अन्य दस्तावेजों के साथ घटना में प्रयुक्त पांच मोबाइल फोन भी बरामद कर लिए गए हैं।

साल्हापुर का रहने वाला राजू इस ठगी का मास्टरमाइंड था। वह पब्लिक डीलिंग और दस्तावेज बनाने का काम खुद ही करता था। राजू ने अपने दोस्त दीपक के साथ मिलकर ठगी की योजना बनाई थी और कागजात आदि छपवाने के बाद तीन और साथियों को लेकर देहरादून आ गया।

यहां लोगों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे जमा करा लिए, लेकिन कई दिन गुजर जाने के बाद भी किसी को लोन नहीं मिला। इससे लोगों को शक होने लगा। इस बीच सभी आठ अगस्त को प्रवेश विहार स्थित आफिस से सामान समेटकर फरार हो गए।

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