राष्ट्रीय

पूजा स्थल कानून मामलाः SC में 31 तक केंद्र को देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल कानून 1991 (Places of Worship Act 1991) के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली दाखिल सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए 31 अक्टूबर तक का वक्त दिया है. केंद्र ने जवाब देने के लिए कोर्ट से और वक्त की मोहलत मांगी थी. साथ ही अदालत ने सभी याचिकाओं पर औपचारिक नोटिस जारी किया है. इन याचिकाकर्ताओं को भी तीन पेज का रिटन सबमिशन दाखिल करने को कहा गया है. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी.

सभी पक्ष अपने जवाब वकील वृंदा ग्रोवर को सौंपेंः SC

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि हां, ये प्रश्न राष्ट्रीय महत्व के हैं. अब इसकी वैधता निर्धारित करने के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट में है. अधिकांश चुनौती स्थानों से जुड़ी हुई हैं. यह ठीक ही देखा गया है कि हमें अभिलेखों से गुजरना पड़ता है. इस पर सीजेआई यूयू ललित ने कहा कि दूसरा पक्ष तर्क देगा कि अयोध्या का फैसला 1991 के अधिनियम से संबंधित था. तब एसजी ने कहा कि ये अयोध्या मामले के फैसले में कवर नहीं होता, फैसले में दूसरे संदर्भ में बात कही गई है.

सीजेआई ललित ने सभी पक्षों को अपने-अपने प्रश्नों की सूची वकील वृंदा ग्रोवर को सौंपने को कहा है. इसके बाद वकील वृंदा ग्रोवर इन सभी को वकील कनु अग्रवाल को सौंपेंगी. जिनका संग्रह करके वह नोटिंग तैयार करके कोर्ट में दाखिल करेंगे.

SC में चुनौती देने वाली 6 याचिकाएं दाखिल

साथ ही केंद्र सरकार की मांग पर सर्वोच्च अदालत ने जवाब देने के लिए समय प्रदान करते हुए 31 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. सीजेआई ललित ने अपने आदेश में सभी पक्षों को तीन पेज का रिटन सबमिशन भी दाखिल करने को कहा. साथ ही यह भी कहा कि इस मामले में अगर कोई और सवाल हो तो वह भी उठा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट अब अगले महीने 14 नवंबर को मामले पर अगली सुनवाई करेगा, जिसमें कोर्ट सुनवाई के लिए दिशा-निर्देश तय करेगा.

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में पूजा स्थल कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं की सुनवाई होनी है. 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्तों में जवाब दाखिल करने के लिए कहा था, जबकि अन्य कई याचिकाएं बाद में दाखिल हुईं.

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