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दून शहर में लोग घंटाघर से आइएसबीटी तक का सफर करेंगे रोपवे से तय

देहरादून, बेहतरीन आबोहवा के लिए मशहूर देहरादून शहर में लोग निकट भविष्य में घंटाघर से आइएसबीटी तक का सफर रोपवे से तय करेंगे। यानी, न जाम का झंझट और न बस-टैक्सी का इंतजार।

उस पर हवा में सफर का आनंद अलग से। न सिर्फ घंटाघर से आइएसबीटी, बल्कि वन अनुसंधान संस्थान से रिस्पना पुल तक भी ये सिस्टम विकसित होगा।

सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को सशक्त बनाने के मद्देनजर दून को रोपवे प्रणाली के लिए उपयुक्त पाया गया। इस मुहिम को परवान चढ़ाने की कड़ी में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक की मौजूदगी में सोमवार को उत्तराखंड और दिल्ली मेट्रो कारपोरेशन के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। देहरादून देश का ऐसा पहला शहर है, जो इस प्रणाली को अपनाएगा।

स्मार्ट सिटी की दिशा में कदम बढ़ा रहे देहरादून में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए पूर्व में मेट्रो रेल का ख्वाब बुना गया था। अध्ययन हुआ तो बात सामने आई कि 25 हजार करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को इतनी रकम जुटाना आसान नहीं है।

साथ ही पैसेंजर भी कम हैं। लिहाजा, मेट्रो की बजाए सार्वजनिक परिवहन के अन्य विकल्पों पर मंथन हुआ। हाल में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक की अगुआई में उच्चस्तरीय दल ने यूरोपीय देशों का दौरा किया। दल ने देहरादून को रोपवे प्रणाली के लिए मुफीद पाया।

अब सार्वजनिक परिवहन के लिए दून में रोपवे प्रणाली की दिशा में सरकार ने पहल की है। सोमवार को विधानसभा में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक की मौजूदगी में देहरादून में रोपवे प्रणाली विकसित करने के लिए उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन और दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। एमओयू पर दिल्ली मेट्रो कारपोरेशन के निदेशक (बिजनेस डेवलपमेंट) एसडी शर्मा और उत्तराखंड मेट्रो कारपोरेशन के निदेशक (परियोजना) बीके मिश्रा ने हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर रोपवे प्रणाली विकसित करने के मद्देनजर डीपीआर तैयार करने के लिए प्रथम किश्त के रूप में 43.30 लाख का चेक भी दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन को प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक जितेंद्र त्यागी, निदेशक परियोजना अरविंद त्यागी समेत उत्तराखंड व दिल्ली मेट्रो कारपोरेशन के अधिकारी मौजूद थे।

  • 25 किमी के करीब होगी परियोजना की लंबाई
  • 2500 करोड़ के लगभग आएगी इसमें लागत
  • पांच माह में तैयार होगी रोपवे परियोजना की डीपीआर
  • दो साल के भीतर (टेंडर के बाद) तैयार होगा प्रोजेक्ट
  • 10 यात्रियों की क्षमता वाली होगी एक रोपवे कार

ये होंगे रूट

पहला :- वन अनुसंधान से घंटाघर होते हुए रिस्पना पुल तक

दूसरा :- आइएसबीटी से घंटाघर होते हुए कंडोली, मधुबन होटल के पास तक

देहरादून शहर के भीतर जहां रोपवे प्रणाली होगी, वहीं देहरादून, ऋषिकेश व हरिद्वार को आपस में जोड़ने के लिए लाइट रेल ट्रांजिट (एलआरटी) सिस्टम विकसित किया जाएगा। शहरी विकास मंत्री के अनुसार इस कड़ी में हरिद्वार से नेपाली फार्म, नेपाली फार्म से देहरादून और नेपाली फार्म से ऋषिकेश के लिए एलआरटी की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

विदेशों की तर्ज पर हरिद्वार शहर में पर्सनलाइज्ड रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (पीआरटीएस) विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। यानी वहां पॉड टैक्सी चलेगी। शहरी विकास मंत्री ने बताया कि हरिद्वार में इस प्रोजेक्ट पर करीब पांच सौ करोड़ की लागत आएगी।

मदन कौशिक (शहरी विकास मंत्री, उत्तराखंड) का कहना है कि देहरादून भारत का पहला शहर है, जो सार्वजनिक परिवहन के लिए रोपवे प्रणाली अपनाने जा रहा है। इसके अस्तित्व में आने से जहां दूनवासियों के साथ ही पर्यटकों को सुविधा मिलेगी, वहीं ट्रैफिक जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी। यही नहीं, देहरादून, ऋषिकेश व हरिद्वार को जोड़ने के लिए एलआरटी और हरिद्वार शहर में पॉड टैक्सी की योजना को तेजी से आगे बढ़ाने को कदम उठाए जाएंगे।

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