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सतपुली के डेढ़ दर्जन गांवों के लोगो को आज भी है झूला पुल का इंतजार

सतपुली: विधानसभा चुनाव की गर्मी धीरे-धीरे पहाड़ को गर्माने लगी है। चुनावी दंगल में उतरे प्रत्याशी घर-घर, गांव-गांव जाकर मतदाताओं को रिझाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। चुनाव की इस गहमा-गहमी के बीच जनपद पौड़ी की पौड़ी व चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र को जोड़ने वाले बड़खोलू पुल आज भी अपने दिन बहुरने के इंतजार में नयार नदी के ऊपर तिरछा खड़ा झूल रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि प्रदेश के तीन-तीन मुख्यमंत्री इस पुल को बनाने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन पुल के दिन आज तक नहीं सुधरे।

पौड़ी विधानसभा क्षेत्र के अतंर्गत बड़खोलू, कंडीगांव, रौतेला, धौलाधार, हैड़ाखोली सहित करीब डेढ़ दर्जन गांवों की जीवन रेखा माने जाने वाला बड़खोलू झूलापुल 2010 में 17-18 सितंबर की रात नयार की भेंट चढ़ गया। 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन सीएम बीसी खंडूड़ी ने झूलापुल के स्थान पर मोटरपुल बनाने की घोषणा कर दी। समय बदला और राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया। कांग्रेस की सरकार आई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस पुल की घोषणा दोहराते हुए शीघ्र निर्माण का वादा किया। पुल की तस्वीर पुरानी ही रही।

फिर सरकार बदली और तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी बड़खोलू पुल निर्माण की घोषणा कर दी। एशियन व‌र्ल्ड बैंक को पुल निर्माण का जिम्मा सौंपा गया। विभिन्न कारणों के चलते पुल निर्माण नहीं हो पाया। ग्राम प्रधान रणवीर सिंह बिष्ट ने बताया कि पुल के नाम पर राजनेता ग्रामीणों से लगातार छल कर रहे हैं। बताया कि ग्रामीण दो-तीन दिन बाद पौड़ी में जिलाधिकारी से मिलकर इस संबंध में वार्ता करेंगे। ग्रामीणों को बंट गया था मुआवजा शासन ने पुल के लिए करीब साढ़े बारह करोड़ की धनराशि स्वीकृत की। इसमें एडीबी ने 12 काश्तकारों को उनकी भूमि का मुआवजा भी प्रदान कर दिया।

एक काश्तकार ने अपने भूमि की रजिस्ट्री विभाग के पक्ष में नहीं की। नतीजा, पुल निर्माण कार्य अधर में लटक गया। ग्राम प्रधान ने बताया कि उक्त काश्तकार ने अनापत्ति संबंधी शपथ पत्र भी संबंधित विभाग को दे दिया था। विभाग ने रजिस्ट्री के बिना पुल का कार्य शुरू न करने की बात कही। बताया कि बीते वर्ष पुल के लिए स्वीकृत धनराशि भी शासन को वापस हो गई। 

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