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उत्तर भारत के लोग अयोध्या में राम मंदिर बनाने के पक्षधर

अयोध्या के रामजन्मभूमि विवाद में उच्चतम न्यायालय के फैसले को भारत के लिए नए युग की शुरुआत करार दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों का मानना है कि अयोध्या विवाद सुलझना भारतीयों के लिए बेहद अहम था। हालांकि, भारतीय अयोध्या मामले को वाकई कितनी अहमियत देते हैं? अयोध्या से धार्मिक जुड़ाव के मद्देनजर इसका सटीक आकलन तो मुश्किल है, लेकिन लोकनीति-सीएसडीएस और मिंट-यूगव के सर्वे से कुछ अंदाजा जरूर मिलता है।

लोकनीति-सीएसडीएस ने यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान अयोध्या मुद्दे पर कई दौर के सर्वे किए। 1996 में विवादित ढांचा विध्वंस के महज चार साल बाद हुए पहले सर्वे में हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं में मंदिर/मस्जिद मुद्दे को लेकर समान ध्रुवीकरण देखने को मिला था। 56 फीसदी हिंदुओं ने विवादित स्थल पर मंदिर तो 58 प्रतिशत मुसलमानों ने मस्जिद निर्माण की पैरवी की थी। 16 वर्ष बाद 2012 में ध्रुवीकरण का असर धुंधला पड़ने लगा था। दोनों ही समुदायों में मंदिर/मस्जिद निर्माण की मांग करने वालों की संख्या 31 फीसदी हो गई थी। इस बीच, राज्य में धर्म के नाम पर राजनीति फिर जोर पकड़ने लगी।

इसी के साथ हिंदुओं में मंदिर निर्माण की मांग में भी तेजी आने लगी, जबकि मस्जिद पर मुस्लिमों का रुख लगभग वही रहा। शहरों और गांवों में शिक्षित से लेकर कम पढ़ा-लिखा तबका तक मंदिर निर्माण के पक्ष में दिखा। हालांकि, मिंट और यूगव के ऑनलाइन सर्वे से पता चलता है कि यूपी के बाहर मंदिर निर्माण के पक्ष में लहर काफी कम है। जनवरी से फरवरी 2019 के बीच 180 शहरों में हुए इस सर्वे में 5038 भारतीयों ने हिस्सा लिया।

जब प्रतिभागियों से पूछा गया कि क्या विवादित स्थल पर राम मंदिर बनना चाहिए तो सिर्फ 36 फीसदी की राय स्पष्ट (यानी हां या नहीं) थी। उत्तर भारत में 33 फीसदी लोग मंदिर निर्माण के पक्षधर थे तो दक्षिण भारत में यह आंकड़ा महज 19 प्रतिशत था। वहीं, आयुवर्ग की बात करें तो युवाओं से लेकर अधेड़ और बुजुर्गों तक की मंदिर बनाने पर लगभग एक राय थी। जबकि राजनीतिक रुझान पर गौर करें तो 38 फीसदी से अधिक भारतीय जनता पार्टी के समर्थक चाहते हैं कि विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण किया जाए। हालांकि, बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक मामला अदालत पर छोड़ने के हिमायती थे। लगभग 16 फीसदी का कहना था कि फैसले चाहे जो भी हो, इससे राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ना चाहिए।

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