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जैविक खेती से उत्तराखंड के किसानों की आमदनी बढ़ेगी

उत्तराखंड जैविक कृषि ऐक्ट के जरिए राज्य ने जैविक स्टेट बनने की ओर कदम बढ़ा दिया। जैविक खेती को प्रोत्साहन से जहां उत्तराखंड एक ब्रांड के रूप के स्थापित होगा, वहीं उपभोक्ता को शुद्ध वस्तुएं मिलेंगी, किसान की आर्थिकी को ताकत। देश में सिक्किम को ऑर्गेनिक स्टेट का दर्जा हासिल है।

वहां 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही है। जबकि उत्तराखंड में यह क्षेत्रफल 1.52 लाख हेक्टेयर है। फिलहाल राज्य में 3.50 लाख किसान जैविक खेती से जुड़े हैं। इस बारे में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल बताते हैं कि रसायनों के जरिए खेती के नुकसान को देख पूरा विश्व जैविक उत्पादों को प्राथमिकता दे रहा है।

इसलिए उत्तराखंड के लिए भी जैविक खेती में काफी संभावनाएं हैं। जैसे कि हर्षिल की राजमा और देहरादून की बासमती के नाम से ब्रांड स्थापित हो सकेंगे। ब्लॉकों में हो रही जैविक खेती: टिहरी में प्रतापनगर, रुद्रप्रयाग में अगस्त्यमुनि, जखोली, ऊखीमठ, चमोली में देवाल, नैनीताल में बेतालघाट, अल्मोड़ा में सल्ट, पिथौरागढ़ में मुनस्यारी, उत्तरकाशी में डुंडा ब्लॉक इस वक्त जैविक खेती के लिए जाने जाते हैं। पहले चरण में इन्हीं ब्लॉकों में ऐक्ट को पूरी तरह से लागू किया जा सकता है।

जमीन की सेहत सुधरेगी: रासायनिक खाद और कीट-खरपतवारनाशकों के प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति घटती जा रही है। कीटनाशक नदी-तालाबों में भी पहुंच जाते हैं। मगर, जैविक खाद एवं बीज के प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और बेहतर फसल भी होगी।

शुद्ध उत्पाद मिलेंगे: जैविक खेती से फसलों में हानिकारक तत्व नहीं सकेंगे। रासायनिक खाद, कीटनाशक के प्रयोग से इसके तत्व फसलों के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। यही नहीं, चारे के जरिए पशुओं के शरीर में भी हानिकारक रसायन पहुंचते हैं। फिर दूध, दही और मांस के जरिए ये मनुष्य के शरीर में आ जाते हैं।

खुशहाल होंगे किसान: जैविक खेती से किसानों की आमदनी बढे़गी। हालिया कुछ साल से जैविक उत्पाद की मांग बढ़ी है। जैविक पदार्थों का मूल्य सामान्य उत्पादों के मुकाबले काफी ज्यादा भी होता है। जैविक खेती से जहां पर्यावरण में सुधार आएगा और फसल का ज्यादा मूल्य मिलेगा।

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