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एलर्जी से बचाव के लिए बिच्छू घास से तैयार किये ऑर्गेनिक रंग, बाजार में है भारी मांग

पिथौरागढ़. देशभर में होली के त्यौहार की तैयारियां जोरों शोरों से चल रही हैं. होली पर रंगों की क्वालिटी हमेशा से सवालों में रही है. हर साल रसायनिक रंगों की वजह से लाखों लोगों को त्वचा की परेशानी (Skin Infections) से जूझना पड़ता है. उत्तराखंड में इस समस्या का हल निकालने की कोशिश की गई है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) की हरेला सोसायटी ने शुद्ध ऑर्गेनिक होली के रंग तैयार किए हैं. इस विधि द्वारा तैयार रंगों से किसी भी तरह की त्वचा से जुड़ी बीमारी नहीं होती है. हम बात कर रहे हैं बिच्छू घास की, जिससे शुद्ध ऑर्गेनिक होली के रंग तैयार किए जा रहे हैं. ये घास पहाड़ी इलाकों में उगाई जाती है.

ऑर्गेनिक रंगों की मांग
होली के मौके पर हरेला सोसायटी द्वारा तैयार इन रंगों की राज्य के साथ ही देश के अन्य इलाकों से भी जमकर डिमांड आ रही है. आमतौर पर होली के पहले बाजारों में केमिकल रंग ही ज्यादा नजर आते हैं, ये रंग भले ही सस्ते पड़ते हैं लेकिन इनका इस्तेमाल कई दफा खतरनाक भी साबित होता है. केमिकल रंग आंखों और स्किन के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं, ऐसे में हरेला सोसायटी के ऑर्गेनिक रंग लोगों को खूब भा रहे हैं.

कपड़ों की थैली में होती है पैकिंग

हरेला सोसायटी ऑर्गेनिक रंगों की पैकिंग कपड़ों की थैली में करती है, ताकि प्लास्टिक के इस्तेमाल से पूरी तरह से बचा जा सके. हरेला सोसायटी के कॉर्डिनेटर ने बातचीत में बताया कि बिच्छू घास से तैयार किये गए रंगों में कई खासियतें मौजूद हैं, ये रंग ऑर्गेनिक होने के साथ ही हैवी मेटल फ्री भी हैं, जिसका इस्तेमाल स्किन के लिए काफी लाभकारी है.

पालक, मूली, गेंदा से भी तैयार रंग
बता दें कि सोसायटी बिच्छू घास के अलावा पालक, चुकंदर, मूली, हल्दी, गेंदा और बुरांश के फूलों से भी ऑर्गेनिक रंग तैयार कर रही है. यही नहीं, जंगल में गिरी पत्तियों से भी नैचुरल रंग तैयार किये जा रहे हैं. स्थानीय संसाधनों के दोहन के लिए सोसायटी ने सस्टेनेबल मैनेजमेंट प्लान तैयार किया है. जानकारी के लिए बता दें कि एक दौर में बिच्छू घास का उपयोग अपराधियों को सजा देने के लिए किया जाता था, तो कई इलाकों में इस घास की सब्जी भी बनाई जाती थी. इस घास को जानवर भी बड़े चाव से खाते हैं.

इसमें भी है बिच्छू घास लाभकारी
1. मासिक धर्म : महिलाओं को मासिक धर्म के समय कई तरह की समस्याएं होती हैं, लेकिन इसमें मौजूद पोषक तत्व व औषधीय गुण मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को कम करने में मदद करते हैं. इसमें मौजूद दर्द निवारक गुण मासिक धर्म के दर्द और ऐंठन को कम करते हैं.

2. एंटी कैंसर के गुण मौजूद : इसके पत्तों से बनी चाय में एंटी कैंसर के गुण मौजूद होते हैं. इसकी चाय में फेनोलिक और फ्लैवोनोइड यौगिकों के साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में मदद करते हैं.

3. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मददगार साबित : जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, उनके लिए बिच्छू घास बहुत फायदेमंद है. इसके पत्तों का नियमित रूप से अगर सेवन किया जाये, तो यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है.

इस घास से बने प्रोडक्ट की भी भारी मांग
बिच्छू घास के बने प्रोडक्ट की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है. इस घास से उत्तराखंड में जैकेट, शॉल, स्टॉल, स्कार्फ, बैग और चप्पल तैयार किये जा रहे हैं. चमोली व उत्तरकाशी जिले में कई समूह बिच्छू घास के तने से रेशा (फाइबर) निकाल कर विभिन्न प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं.

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