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गूलरभोज बौर डेस्टिनेशन में सरकारी संपत्ति की लूट पर मौन साधे हैं सिंचाई विभाग के अफसर

गूलरभोज (ऊधमसिंह नगर): जवां होते बौर डेस्टिनेशन और पर्यटकों की बढ़ती आमद देख जलाशय की डाउनस्ट्रीम (नीचे की ओर या अनुप्रवाह) की सरकारी भूमि पर दबंगों ने अतिक्रमण की दुकानें गढ़ डालीं। जेसीबी से गहरी नाली खोद हदबंदी कर दी। ग्रामीण विरोध न करें इसके लिए उन्हें सब्जबाग दिखा दिया कि उक्त भूखंड में सरकार दुकानें बनाकर उनको हिस्सेदारी दी जाएगी। यह कहकर एक सप्ताह पूर्व जमीन पर बजरी, रेता, तार डाल दिया है साथ ही बल्लियों से निशान लगाकर अवैध निर्माण की नीव रख दी। लेकिन इस हकीकत से ग्रामीण जैसे ही वाकिफ हुए तो मोर्चा खोल दिया। भड़के लोगों ने तार, बल्लियां उखाड़कर दबंगों के खिलाफ अब मोर्चा खोल दिया।

विकसित होते बौर डेस्टिनेशन के ठीक बगल की डाउन स्ट्रीम के सामने करीब एक एकड़ से ज्यादा भूखंड को कब्जाने के लिए एक सप्ताह पूर्व प्रेमचंद, सुरेश, संतोख सिंह आदि ग्रामीणों के घरों के सामने से जेसीबी से गहरी नाली खोदी गई। इस दौरान आम, अमरुद, जामुन जैसे फलदार पेड़ों को जड़ से उखाड़ कर फेंक दिया गया। ग्रामीणों ने जब विरोध किया तो दबंगों ने बताया कि सरकार द्वारा उक्त भू-खंड पर दुकानें बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। दुकानें स्थानीय ग्रामीणों व बेरोजगारों को दी जाएंगी। ऐसे आश्वासन पर शुरू में तो ग्रामीण शांत हो गए। पर पिछले कुछ दिनों से दबंगों की संदिग्ध गतिविधियां व हलचल देख शुक्रवार सुबह गांव की बुजुर्ग महिलाएं, आदमी व युवा भड़क गए। भारी संख्या में ग्रामीणों ने तार,बल्लियां उखाड़ कर विरोध किया। पूर्व प्रधान चानन सिंह, बुजुर्ग महिला कृष्णा देवी सहित ग्रामीणों का आरोप है कि सत्ताधारी दल के रसूखदार नेता के इशारे पर यह सब किया गया। धमकी दी गई कि सरकारी कार्य में बाधा डाली तो जेल में डाल दिए जाओगे। भड़के ग्रामीणों ने कहा कि अब किसी भी सूरत में दबंगों को जमीन में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा।

प्रदर्शन करने वालों में तारावंती, संतो बाई, बलवीर सिंह, रमेश चंद, रंगपाल, सोनपाल, प्रेमचंद सहित तमाम ग्रामीण मौजूद थे।

जिस सरकारी भूमि पर कब्जे का खेल खेला जा रहा है, वह सिंचाई विभाग की है। लेकिन अपनी ही सरकारी भूमि की लूट यह अफसर आंखें मूंदे देख रहे हैं। इसकी वजह सत्ता का रसूख है। जिसकी सरपरस्ती में यह सारा खेल चल रहा है। सिचाई खंड रुद्रपुर के ईई दीक्षांत से बात की गई तो इतना भर बोले कि जेई ने मौका मुआयना किया है। मौका मुआयना में किया क्या है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। वहीं, चौकी प्रभारी कैलाश चंद्र बोले, सिचाई विभाग के अफसर मामले में रिपोर्ट करते हैं तो कार्रवाई की जाएगी। अब तक इस मामले में ग्रामीणों व सिचाई विभाग की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है।

संवेदनशील है डाउन स्ट्रीम की बर्म

गूलरभोज : जलाशय या तालाब के किनारों को बर्म कहा जाता है। बौर जालाशय के बढ़े जलस्तर में तेज हवाओं से उठती लहरों का टकराव पिचिग रोकता है, जबकि डाउन स्ट्रीम की बर्म सीपेज (रिसाव) को थामे रहती है। इस बर्म में दुकानें बनाने की कवायद चल रही है, उससे बर्म का कमजोर होना तय है। गौरतलब है कि बौर जलाशय अपनी तय मियाद करीब-करीब पूरा कर चुका है। ऐसे में कोई बड़ा हादसा हुआ तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।

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