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खराब पौधे पर नर्सरी वाले जेल जाएंगे

घटिया क्वालिटी का पौधा या बीज देने पर नर्सरी संचालकों को जेल भी जाना पड़ सकता है। न केवल प्राइवेट नर्सरी, बल्कि सरकारी नर्सरी में तैनाती उद्यान विभाग के सरकारी कर्मचारी भी। बुधवार को कैबिनेट में मंजूर किए गए नर्सरी ऐक्ट में सरकार ने बागवानों के हित में कई कड़े प्रावधान किए हैं।

नर्सरियों में आने वाले पौधे की जांच के लिए भी राज्यस्तर पर सिस्टम तैयार किया जाएगा। उद्यान विभाग को समय-समय पर नर्सरियों की जांच और कार्रवाई का अधिकार होगा। सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि इस कानून के लागू होने से बागवानी से जुड़े काश्तकारों को धोखाधड़ी से मुक्ति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता था कि नर्सरी बड़े-बड़े दावे करते हुए पौधे बेचती थी। कई बार तीन-चार साल की मेहनत के बाद पौधे से अपेक्षित नतीजे नहीं मिलते हैं। यह किसानों के साथ ठगी जैसा है। कौशिक ने कहा कि नर्सरी ऐक्ट में प्रावधान किया गया है कि पौध बेचते समय नर्सरी संचालक को लिखित में पौधे की गारंटी भी देनी होगी।

प्राइवेट के साथ-साथ सरकारी नर्सरियों पर भी यह कानून लागू होगा। उन्होंने बताया कि यदि पौध ने गारंटी के अनुसार फसल नहीं दी तो नर्सरी संचालक को हर्जाना देना होगा। उसे छह महीने की जेल या 50 हजार रुपये तक जुर्माना भी देना पड़ेगा। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि ये दोनों सजाएं एक साथ भी लागू हो सकती हैं।

पांरपरिक उत्पादों का समर्थन मूल्य तय करने और खरीदने की व्यवस्था भी की जा रही है। कैबिनेट बैठक में मंडियों में रिवॉल्विंग फंड बनाने का निर्णय किया गया है। मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि हर मंडी की आय और विकास निधि से 10% राशि लेकर रिवॉल्विंग फंड बनाया जाएगा। पहाड़ी इलाकों के विकास में इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

देश में पहली बार है, जब किसी राज्य ने जैविक खेती और नर्सरी ऐक्ट एवं परंपरागत अनाजों को समर्थन मूल्य पर लेने के लिए रिवॉल्विंग फंड बनाने का निर्णय किया है। दो साल से राज्य जैविक इंडिया पुरस्कार जीतता आ रहा है। ऐक्ट बनने से जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। नर्सरी ऐक्ट बागवानों के हितों को सुरक्षित रखेगा।

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