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अब ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पड़ेगी भारी

देहरादून:पुलिस की गैरमौजूदगी में भी ट्रैफिक नियमों की अनदेखी आपको भारी पड़ सकती है। क्योंकि, अब कोई भी शख्स ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की फोटो खींचकर या वीडियो बनाकर सीधे पुलिस को भेज सकता है।

यह संभव होगा ‘ट्रैफिक आई उत्तराखंड’ मोबाइल एप से, जिसे उत्तराखंड पुलिस के ट्रैफिक निदेशालय ने तैयार किया है। यह एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। हालांकि, इसकी विधिवत लांचिंग जल्द ही की जाएगी।

 

बीते साल राज्य में यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर डेढ़ लाख से अधिक चालान हुए और ड्राइविंग लाइसेंस निरस्तीकरण की रिपोर्ट भेजी गई।

पुलिसिया कार्रवाई का ये आंकड़ा यह बताने के लिए पर्याप्त है कि राज्य में लोग यातायात नियमों के पालन के प्रति कितना गंभीर हैं।

यही वजह है कि यातायात निदेशालय ने खास तरह का मोबाइल एप तैयार किया है। जिसके जरियेे सड़क पर चलने वाले लोग भी पुलिस की ‘आंख’ बन सकेंगे।

गूगल प्ले स्टोर से करें डाउनलोड

यातायात निदेशक केवल खुराना ने बताया कि ‘ट्रैफिक आई उत्तराखंड’ एप तैयार हो चुका है। कोई भी स्मार्टफोन धारक इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकता है।

एप से फोटो लेने या वीडियो बनाने का समय, लोकेशन आदि का भी पता चल जाएगा। इससे अगर कोई व्यक्ति पुरानी फोटो या वीडियो डालेगा तो उसकी पहचान आसानी से हो जाएगी।

 

ऐसे काम करेगा एप

इस एप के होमपेज पर ही फोटो या वीडियो अपलोड करने का ऑप्शन है। फोटो या वीडियो को अपलोड करने से पहले जिले का चयन करना होगा।

इसके बाद फोटो या वीडियो अपलोड करके सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करते ही उक्त सामग्री जिले की पुलिस के कंट्रोल रूम को मिल जाएगा।

पुलिस कंट्रोल रूम से फोटो या वीडियो की क्रॉस चेकिंग कराने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फोटो और वीडियो भेजने वालों के नाम-पते का जिक्र कहीं भी किसी से नहीं किया जाएगा।

हैकिंग टेस्ट के बाद लॉन्च होगा ई-चालान सिस्टम

 

उत्तराखंड में ई-चालान सेवा शुरू करने से पहले पुलिस यह सुनिश्चित कर लेना चाहती है कि उसे किसी तरह से हैक तो नहीं किया जा सकता है।

इसके लिए ई-चालान की मशीनों को हैकिंग टेस्ट के लिए भेजा गया है। हैकिंग टेस्ट का जिम्मा एसटीएफ और देहरादून पुलिस के साइबर एक्सपर्ट को दिया गया है। हैकिंग टेस्ट पास होने के बाद मशीनों को फरवरी के मध्य तक लॉन्च कर दिया जाएगा।

उत्तराखंड में ई-चालान सेवा शुरू करने की तैयारी करीब तीन महीने से चल रही है। करीब 12 सौ हाईटेक ई-चालान मशीनों की आपूर्ति भी हो गई और इसे परिवहन, बैंक, पुलिस और एनआइसी से लिंक भी जा चुका है।

  • ट्रायल सफल रहने के बाद पिछले सप्ताह इसे विधिवत लॉन्च करने के लिए पुलिस अधिकारियों की बैठक में यह मुद्दा उठा कि ई-चालान मशीनें क्या साइबर हैकरों की पहुंच से दूर हैं। क्या इन्हें हैक नहीं किया जा सकता है? सूत्रों की मानें तो इस पर पुलिस महानिदेशक अनिल के रतूड़ी ने निर्देश दिया कि पहले मशीनों का हैकिंग टेस्ट कराया जाए। मशीनें टेस्ट में पास हो जाएं, तभी इस सेवा को शुरू किया जाएगा।

दूसरे चरण में बटेंगी 12 सौ मशीनें

 

ई-चालान सेवा के लांचिंग के समय मौजूद 12 सौ मशीनों का वितरण किया जाएगा। प्रयोग के पूरी तरफ सफल होने के तीन महीने बाद दूसरे चरण में फिर से 12 सौ मशीनों का वितरण किया जाएगा। निदेशालय का लक्ष्य है कि चालान का अधिकार रखने वाले सभी पुलिसकर्मियों को ई-चालान मशीनों से लैस कर दिया जाए।

 

यातायात निदेशक केवल खुराना ने बताया कि ई-चालान मशीनें पूरी तरह से सुरक्षित हैं, लेकिन साइबर क्राइम के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसे देखते हुए मशीनों का हैकिंग टेस्ट कराने का निर्णय लिया गया है।

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