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देश की राजधानी में नेहरू संग्रहालय का नाम अब ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ होगा

नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित नेहरू-गांधी परिवार की विरासत नेहरू संग्रहालय (Nehru Memorial Museum) यानी द नेहरू मेमोरियल म्यूजियम का नाम अब ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ (Nehru Memorial Museum) होगा. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो तीन मूर्ति भवन पर बने इस ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की ओर से 14 अप्रैल को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के जन्मदिन के मौके पर किया जाएगा. बता दें कि इस नेहरू मेमोरियल म्यूजियम में अब तक केवल भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी यादों को संजोया गया था, मगर इसे प्रधानमंत्री संग्रहालय नाम देने के बाद देश के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों से जुड़ी यादों को अब इस म्यूजियम में जगह दी जाएगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसदीय दल की बैठक में तीन मूर्ति भवन परिसर में बन रहे पूर्व प्रधानमंत्रियों के संग्रहालय के महत्व को रेखांकित किया और सासंदों से कहा कि यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ही सरकार है, जिसने सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान का सम्मान किया है. बैठक में प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से सामाजिक न्याय को समर्पित ‘सामाजिक न्याय पखवाड़ा’ के तहत अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में छह अप्रैल से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करने को कहा. साथ ही उन्होंने पार्टी सांसदों से अनुसूचित जाति व जनजातियों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रचार करने को भी कहा.

14 अप्रैल को संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जयंती पर पूर्व प्रधानमंत्रियों के संग्रहालय के उद्घाटन से पहले बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्रियों के संग्रहालय का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही इसमें भाजपा के एक प्रधानमंत्री हों लेकिन देश के हर एक प्रधानमंत्री का योगदान महत्वपूर्ण है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए.

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमारे तो एक ही हैं, बाकी उनके हैं ….वह किसी भी दल के रहे हों, फिर भी हमने पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान को सम्मान दिया है. हमें दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी प्रधानमंत्रियों का सम्मान करना चाहिए. आप सभी को यहां जाना चाहिए. बता दें कि भाजपा अक्सर यह आरोप लगाती रही है कि आजादी के बाद अधिकांश समय कांग्रेस ने देश पर शासन किया और वह सिर्फ गांधी-नेहरू परिवार के प्रधानमंत्रियों का ही गुणगान करती रही थी जबकि अन्य के साथ उसका व्यवहार ठीक नहीं रहा.

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