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पहाड़ की इस बेटी ने गांव वालों को जोड़ा आधुनिक भारत से

नैनीताल. कुछ करने का जुनून, गांव को आगे बढ़ाने का संकल्प और खुद पर भरोसा इन तीन चीजों के साथ पहाड़ की बेटी आगे बढ़ी तो मिसाल बन गई. कामयाब होने के लिए पहाड़ से शहर की ओर पलायन करने वालों को बेतालघाट की बेटी पूजा रावत ने एक नई राह दिखाई है. महानगर में पढ़ाई करने के बाद वह वापस घर आई और अब घर ही नहीं, बल्कि अपने गांव और इलाके की सूरत बदल रही है उसे नए कैशलेस जमाने से जोड़ रही है.

कोसी नदी में न जाने कितना पानी निकल गया, मगर बेतालघाट की पूजा का संघर्ष जारी है. आंखों में सपने ऐसे हैं कि दुनिया मुट्ठी में कर ले. महानगर में पढ़ने के बाद पूजा ने अपने गांव को कर्मभूमि बनाया तो गांव की नई कहानी लिखने लगी. गांव के लोगों को जागरूक करने के साथ वित्तीय साक्षरता गांव के लोगों तक पहुंचाई और गांव कैशलेस करने के लिए गांव में ही आधार और बैंकिंग सेवा केन्द्र शुरू किया.

आज तक पूजा रावत ने एक हजार लोगों का खाता इस केन्द्र में ही खोल दिया. अब गांव के लोगों का दूध से लेकर फसल बेचने का पैसा सीधे खातों में ही आ रहा है. इतना ही नहीं अब तो आसपास के गांव के लोग भी इस केन्द्र का फायदा लेने लगे हैं और जो केन्द्र तक नहीं पहुंच पाते उनको गांव में ही जाकर पूजा रावत सुविधा देने लगी हैं.

दरअसल गांव के पास से ही इंटर कर पूजा पढ़ाई के लिए शहर चली गई थीं. पिता के निधन के बाद चार बहनों में दूसरे नम्बर की पूजा पर परिवार का भी भार आ गया. घर के काम और अपने सपनों से लड़कर पूजा ने अपनी दोनों छोटी बहनों को पढ़ने के लिए बाहर भेजा और घर पर मां की देखरेख की ज़िम्मेदारी भी बखूबी निभाने लगी.

एक मिशन के तौर पर गांव को कामयाब करने की तमन्ना परवान चढ़ने लगी तो पूजा रावत आज गांव के लोगों के लिए मिसाल बन गई हैं. बुजुर्ग और युवा दोनों ही पहाड़ की इस बेटी को आदर्श के रूप में देख रहे हैं.

काम को ही पूजा मानने वाली पहाड़ की इस बेटी ने अपने गांव को चुना है और वह उन लोगों के लिए भी मिसाल बन गई है जो रोजगार न होने के चलते पहाड़ से पलायन करते हैं.

 

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