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जिम कॉर्बेट पार्क में 270 से अधिक पर्यटक नहीं कर सके जंगल सफारी

रामनगर: ढेला गांव को इको सेंसेटिव जोन से बाहर करने की मांग को लेकर रविवार को ग्रामीणों ने जिम कॉर्बेट पार्क के ढेला गेट और झिरना गेट पर ताला जड़ दिया।

जिसके चलते इन दाेनों जोन में सुबह की पाली में करीब 270 पर्यटक जंगल सफारी नहीं कर सके। हालांकि पार्क वार्डन के आश्वासन पर शाम की पाली में पर्यटकों की आवाजाही पर ग्रामीणों ने रोक नहीं लगाई।

ग्रामीणों के आक्रोश के चलते भ्रमण पर जाने वाले पर्यटकों को घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। वहीं ग्रामीणों की माग के समर्थन में ब्लॉक प्रमुख रेखा रावत भी धरने पर बैठी रहीं।

आश्‍वासन पर माने ग्रामीण

रविवार सुबह से ही सैकड़ों ग्रामीण पार्क के ढेला गेट पर पहुंच गए। इस दौरान ग्रामीणों ने राज्य सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके गाव को इको सेंसेटिव जोन में रखे जाने के कारण गांव में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं।

उनके बच्चे किसी प्रकार का कोई नया रोजगार नहीं पा रहें हैं, जिसके चलते पलायन का खतरा बना हुआ है। गुस्साएं ग्रामीणों के तेवर देखते हुए दोपहर बाद एसडीएम हरगिरी गोस्वामी व पार्क वार्डन शिवराज चंद्र दोपहर बाद ग्रामीणों से वार्ता करने पहुंचे।

जहां पर उन्होंने 27 नवंबर को देहरादून में प्रस्तावित वाइल्ड लाइफ बोर्ड का हवाला देते हुए कहा कि इस बैठक में ग्रामीणों का पक्ष रखा जाएगा। जिससे ढेला को इको सेंसेटिव जोन से बाहर रखा जा सके।

अधिकारियों के आश्वासन पर ग्रामीणों ने गेट का ताला खोलते हुए 27 नवंबर तक के लिए अपना आंदोलन स्थगित कर दिया।

जिसके बाद पार्क के ढेला व झिरना जोन शाम की पाली में सैलानियों को दोपहर बाद प्रवेश दिया गया। पार्क वार्डन ने बताया कि शिवराज चंद्र ने बताया कि जो पर्यटक नहीं जा पाए उनका पैसा लौटाया जाएगा।

इस दौरान ब्लॉक प्रमुख के पति इंदर रावत, ग्राम प्रधान मदन राम, मनमोहन सिंह बिष्ट, संजय कुमार, मदन बिष्ट, प्रताप रावत, हरीश रावत, राजू मेवाड़ी, ललित डंगवाल, जसवंत रावत, भूपेंद्र खाती, विक्रम रावत, रमेश अधिकारी, कविंद्र बिष्ट, कमल अधिकारी, अजय सिंह करगेती, नंदन सिंह, प्रभात करगेती, ख्यालीदत्त डोर्बी, कमला देवी, मंजू अधिकारी, दीपा देवी, अनीता देवी, हीरा देवी, संजय अधिकारी, हंसी देवी, भावना अधिकारी, आनन्द सिंह नेगी, गणेश नेगी, मनोज रावत, रणजीत सिंह, दीवान सिंह अधिकारी, गोपालदत्त पपनै मौजूद रहे।

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