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अलकनंदा नदी के तट पर आयोजित की गई बैठक

रुद्रप्रयाग [दिलबर सिंह बिष्ट] : प्रकृति से ही पर्यावरण सुरक्षित है। इसी उद्देश्य को लेकर अलकनंदा नदी के तट पर जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक आयोजित की गई।अध्यक्ष जिला गंगा संरक्षण समिति मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि लगातार बढ़ती आबादी, कस्बों और गाँवों पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ता जा रहा है,

प्लास्टिक कूड़ा और कस्बों में सीवेज की गंदगी पर्यावरण के लिए एक चुनौती बन रही है। हालांकि इसके लिए सरकारी स्तर से पूरे प्रयास किए जा रहें है, और समितियां गठित की गई जो जनता को जागरूक करने के साथ ही सोर्स सेग्रिगेशन व स्वच्छता अभियान चला रही है, परन्तु जन सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। जन सहभागिता के बदौलत हम इस अभियान में पूर्ण रूप से  सफल हो सके हैं।

जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारियों और समितियों को निर्देशित किया कि वह सफाई कर्मचारियों का वेतन समय से दें साथ अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत सफाई के सभी संसाधन व उपकरण उन्हें उपलब्ध कराएंे। उन्होनें कहा कि जो भी कस्बे या गाँव स्वच्छता में उत्कृष्ट कार्य करेगें उन्हें पुरूस्कृत किया जाएगा।

साथ ही कस्बों में गठित समितियों के बीच प्रतिस्पद्र्वा होनी चाहिए कि किस समिति के द्वारा अपने कस्बे में बेहतर कार्य किया जा रहा है। जनपद में आने वाला हर यात्री, पर्यटक जनपद की अच्छी छवि अपने साथ लेकर जाए, यह हमारा प्रयास है।

इस अवसर पर कार्याक्रम के संयोजक (उप वन संरक्षक) वैभव कुमार ने कहा कि हर व्यक्ति गंगा संरक्षण समिति का सदस्य है। समिति के माध्यम से समय-समय पर संचालित कार्यक्रम के परिणाम बेहतर आए है। गंगा की निर्मलता को बनाये रखने के लिए सभी पहल व प्रयास किए जाएगें।

कार्यक्रम में उपस्थित जिला गंगा सरंक्षण समिति के बं्राड एम्बेसडर जगत सिंह जंगली ने कहा कि गंगा का स्थान हर भारतीय के दिल में खास है। अद्वितीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखने वाली गंगा देश की सबसे पवित्र नदी है। पर्यावरण प्रेमी राजेन्द्र सिंह गोस्वामी ने गंगा के पौराणिक महत्व को उल्लेख किया।

इस अवसर पर अधिशासी अभियन्ता सिचांई प्रताप सिंह विष्ट, के.एस. नेगी, पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल, जिला पंचायत राज अधिकारी चमन सिंह राठौर, जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी हरीश चन्द्र सहित पर्यावरण मित्र उपस्थित थे।

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