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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई कुख्यातों की बुरी नजर हरिद्वार के ट्रैवल्स कारोबार पर

हरिद्वार। हरिद्वार के ट्रैवल्स कारोबार में कुख्यात संजीव उर्फ जीवा का सीधा दखल रहा है। मगर पिछले कुछ समय से जीवा के शूटर और गुर्गों की एक-एक कर गिरफ्तारी होने से उसका नेटवर्क कमजोर पड़ गया। जिस कारण करीब पांच-छह माह से ट्रैवल्स का कारोबार कुख्यातों की हिस्सेदारी से मुक्त चल रहा है। इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई कुख्यातों की बुरी नजर हरिद्वार के ट्रैवल्स कारोबार पर है। ताजा घटना भी इसी कोशिश का नतीजा है।

हरिद्वार में करीब डेढ़ दशक से अपराध की दुनिया में कुख्यात सुनील राठी और कुख्यात संजीव उर्फ जीवा सक्रिय हैं। शुरूआत में दोनों ने रंगदारी को अपना मूल पेशा बनाया। बाद में जमीन, केबल, ट्रैवल्स जैसे धंधों में हाथ आजमाए। विवादित जमीनों में हिस्सेदारी तय करने के बाद दोनों ने शहर की कई बेशकीमती जमीनों में चांदी काटी। राठी के गुर्गे प्रवीण वाल्मीकि, नरेंद्र वाल्मीकि भी पिछले तीन चार साल से रंगदारी के धंधे में सक्रिय हैं। हरिद्वार से चलने वाली प्राइवेट बसों, ट्रैवल्स व्यवसाय और ट्रांसपोर्ट के धंधे में जीवा का एक तरफा राज चलता आया है। पांच माह पहले ट्रांसपोर्ट कारोबारी से हिस्सेदारी तय करने के मामले में पुलिस ने उसके गुर्गे सगे भाई विक्की ठाकुर व निक्की ठाकुर व एक अन्य को जेल भेजा। इसके बाद विक्की और निक्की ठाकुर ने रोशनाबाद जेल से ही कनखल के भाजपा नेता व ट्रैवल्स कारोबारी से 20 लाख की रंगदारी मांगी।

सूत्र बताते हैं कि इसके बाद से जीवा ने उनसे किनारा कर लिया और ट्रैवल्स कारोबार रंगदारी के अभिशाप से मुक्त हो गया। हरिद्वार में किसी न किसी रूप से सक्रिय रहने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई कुख्यात इससे वाकिफ हैं और वह ट्रैवल्स के धंधे में जीवा की जगह अपने पांव जमाना चाहते हैं। पुलिस मानकर चल रही है कि ऋषिपाल राणा ने भी इसी मंशा से मोनू राणा व उसके साथियों के साथ मिलकर कदम आगे बढ़ाए। मुकेश गोयल ने कई दिन तक रंगदारी की बात दबाए रखी।

 

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