राष्ट्रीय

100 करोड़ के घोटाले में फंसे पार्थ चटर्जी को ममता ने मंत्री पद से हटाया

100 करोड़ से ज्यादा के बंगाल शिक्षक भर्ती  घोटाले में गिरफ्तार राज्य के उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी पर गाज गिर गई है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की ममता सरकार से मंत्रिमंडल से पार्थ की छुट्टी हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्थ को मंत्री पद से हटा दिया है। उन्हें तीनों मंत्रालयों से हटाया गया है। गिरफ्तारी के छह दिन बाद उन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है। इससे पहले पार्थ के इस्तीफे को लेकर जिस तरह से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में अंदर ही सुर उठने लगे थे, इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अहम बैठक की।

मु्ख्यमंत्री बनर्जी ने कैबिनेट की बैठक की। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में भी पार्थ चटर्जी की मंत्री पद का मामला उठा। उल्लेखनीय है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ही पार्थ चटर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सीएम ममता बनर्जी  चटर्जी से पहले ही किनारा कर चुकी हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव कुणाल घोष ने उन्हें मंत्रिमंंडल समेत सभी पदों से हटाने की मांग की थी। इससे पहले टीएमसी महासचिव कुणाल घोष ने आज ट्वीट कर कहा, ‘पार्थ चटर्जी को तुरंत मंत्रालय और पार्टी के सभी पदों से हटाया जाना चाहिए। उन्हें निष्कासित किया जाना चाहिए।

वॉश रूम में भी मिला नोटों का जखीरा 
ईडी ने पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर अर्पिता मुखर्जी के चार ठिकानों को खंगाला है। कमरों के अलावा वॉश रूम में भी नकदी छिपाकर रखी गई थी। अब तक 53 करोड़ से ज्यादा की नकदी और सोना व डॉलर आदि मिले हैं। इसे देखते हुए ईडी को आशंका है कि यह घोटाला 100 करोड़ से ज्यादा का हो सकता है।

ईडी को ‘अदृश्य हाथों’ की तलाश
बंगाल शिक्षक घोटाला मामले में ईडी को अब अदृश्य हाथों की तलाश है। इन लोगों तक घोटाले की रकम पहुंची है। ईडी सूत्रों के अनुसार दोनों से पूछताछ और अर्पिता के घर से मिली तीन डायरियों से पता चलता है कि घोटाले के पैसे कुछ ऐसे लोगों तक पहुंचे हैं, जिनके बारे में अभी सटीक कुछ कहा नहीं जा सकता। इन डायरियों में कई जगह सांकेतिक भाषा में बहुत कुछ लिखा गया है। ईडी पूछताछ में इन सांकेतिक भाषाओं को समझने का प्रयास कर रही है। माना जा रहा है कि इन सांकेतिक भाषा में उन अदृश्य हाथों का भी जिक्र है, जिन तक घोटाले का पैसा पहुंचा है।

दोषी पाया जाए तो सजा दें, मुझे फर्क नहीं पड़ता : ममता
पार्थ चटर्जी को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पहले ही कह चुकी हैं कि वह चाहती हैं कि सच्चाई सामने आए। वह भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करती हैं। सभी लोग एक जैसे नहीं होते हैं। बनर्जी ने कहा था, ‘एक निश्चित समय सीमा के अंदर सच्चाई के आधार पर फैसला दिया जाना चाहिए। अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी जाती है।’

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