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महाराष्ट्र के रंजीतसिंह ने जीता 10 लाख डॉलर का ग्लोबल टीचर प्राइज

इस साल का वैश्विक शिक्षक सम्मान (Global Teacher Prize) रंजीतसिंह दिसाले को दिया गया है. उन्हें यह सम्मान लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दिया गया है, जिसमें से अधिकतर पश्चिमी भारत के ग्रामीण स्कूलों में गरीब आदिवासी समुदायों से हैं. यह सम्मान मिलते ही दिसाले ने यह घोषणा किया है कि वह 10 लाख डॉलर (7.38 करोड़ रुपये) की आधी प्राइज मनी को नौ अन्य फाइनलिस्ट्स के साथ साझा करेंगे. प्राइज ऑर्गेनाइजर्स के मुताबिक, दिसाले को यह सम्मान महाराष्ट्र राज्य के परिटेवाड़ी में जिला परिषद प्राइमरी स्कूल में लड़कियों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने को लेकर दिया गया है. उन्होंने बालिकाओं के लाइफ चांसेज को ट्रांसफॉर्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

नौ फाइनलिस्ट्स को देंगे 55-55 हजार डॉलर

इस सम्मान की घोषणा अभिनेता और लेखक स्टीफन फ्राई ने लंदन स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में एक वर्चुअल सेरेमनी ब्रॉडकॉस्ट के जरिए की. दिसाले को इस सम्मान के बारे में अपने परिवार के साथ भारत में रहते हुए मिली. अपनी विनर स्पीच में दिसाले ने कहा कि वह प्राइज मनी का आधा हिस्सा नौ अन्य फाइनलिस्ट्स के साथ साझा करेंगे. इसका मतलब यह हुआ कि सभी नौ अन्य फाइनलिस्ट्स 55-55 हजार डॉलर (40.6 लाख रुपये) पाएंगे. इस अवार्ड की स्थापना वार्के फाउंडेशन ने किया है और इसे यूनेस्को के सहयोग से दिया जाता है.

कन्नड़ सीख अनुवाद किया स्कूल टेक्स्ट बुक्स

दिसाले ने शिक्षक के तौर पर 2009 में पढ़ाना शुरू किया. उस समय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम थी और कम उम्र में ही उनका विवाह सामान्य बन चुका है. इसके अलावा पाठ्यक्रम भी लड़कियों को उनकी मुख्य भाषा कन्नड़ में उपलब्ध नहीं था. दिसाले ने कन्नड़ सीखकर क्लास टेक्स बुक्स का अनुवाद किया.

इसके अलावा उन्होंने डिजिटल लर्निंग टूल्स का भी सहारा लिया और हर बच्चे के लिए विशेष प्रोग्राम तैयार किया. अब उनके तैयार किया गया क्यूआर कोडेड टेक्सबुक्स देश भर में प्रयोग किया जा रहा है. स्कूल अटेडेंट भी अब 100 फीसदी तक है और गांव की एक लड़की ने स्नातक भी कर लिया है.

विश्व शांति के लिए भी प्रोजेक्ट की शुरुआत

दिसाले ने सूखे से जूझ रहे जिलों में पर्यावरणीय परियोजनाओं की भी शुरुआत की है. इसके अलावा उन्होंने “Let’s Cross the Borders” प्रोजेक्ट के जरिए विश्व शांति को बढ़ावा देने के लिए भारत व पाकिस्तान, फिलिस्तीन व इजराइल, इराक व ईरान और अमेरिका व नॉर्थ कोरिया को युवाओं को आपस में जोड़ा जा रहा है.

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