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पांचवें धाम के रूप में विकसित नहीं हो सका मद्महेश्वर धाम

रुद्रप्रयाग :  पंच केदारों में द्वितीय मद्महेश्वर धाम को सरकार पांचवें धाम के रूप में विकसित नहीं कर पाई। सरकार ने इसे पांचवें धाम के रूप मे विकसित करने की घोषणा की थी।

साथ ही यहां जरूरी सुविधाएं जुटाने के लिए रोडमैप तैयार करने की बात भी कही गई थी। इसके बावजूद इस दिशा में धरातल पर कोई भी प्रयास नहीं हुए।

यही कारण है कि जहां केदारनाथ धाम में प्रति वर्ष लाखों यात्री दर्शनों को पहुंचते हैं, वहीं मद्महेश्वर में यह आंकड़ा दस हजार के पार भी नहीं पहुंच पाता। इसका खामियाजा इस यात्रा मार्ग से जुड़े व्यापारियों को भुगतना पड़ता है।

उच्च हिमालय के चौखंभा शिखर की तलहटी में समुद्रतल से 10788 फीट की ऊंचाई पर स्थित मद्महेश्वर धाम में भगवान शिव के मध्य भाग के दर्शन होते है।

केदारनाथ की तरह यहां भी भगवान शिव के स्वयंभू लिंग के रूप में विराजमान हैं। यहां भी आद्य शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपरा के तहत दक्षिण भारतीय लिंगायत समुदाय के पुजारी को ही पूजा का अधिकार है।

धाम की इसी महत्ता को देखते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुखिया हरीश रावत ने इसे पांचवें धाम के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। अभी तक स्थिति ज्यों की त्यों है। यही वजह है कि यात्री यहां आने से परहेज करते हैं।

इस वर्ष जहां केदारनाथ धाम में दस लाख से अधिक यात्री दर्शनों को पहुंचे, वहीं मद्महेश्वर में यह आंकड़ा 6138 पर सिमट गया। दरअसल, यहां न तो यात्रियों के खाने-ठहरने की व्यवस्था है, बिजली-पानी और स्वास्थ्य की सुविधा भी नहीं है। मंदिर तक जाने वाला पैदल मार्ग भी बुरी स्थिति में है। इससे जीवट यात्री ही यहां जाने का साहस जुटा पाते हैं।

मध्यमेश्वर यात्रा जुड़े रांसी के पूर्व प्रधान रूप सिंह कहते हैं कि सरकार ने मद्महेश्वर यात्रा की ओर कभी ध्यान नहीं दिया। इसका खामियाजा यात्रा से जुड़े स्थानीय व्यापारियों को भी भुगतना पड़ रहा हैं।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, ऊखीमठ के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी के अनुसार, मंदिर समिति मद्महेश्वर धाम के प्रति उसी तरह संजीदा है, जैसे केदारनाथ समेत अन्य धामों के प्रति। लगातार प्रचार-प्रसार के साथ ही पूरे देश में इस धाम की महत्ता लोगों को बताई जाती है। हालांकि, यहां आवश्यक सुविधाएं केदारनाथ तुलना में काफी सीमित हैं।

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