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त्रिवेंद्र! नायक, नेतृत्व और निर्णय

समय इतिहास बनने और बनाने का मौक़ा देता हैं। बशर्ते आप उत्कृष्ट की पराकाष्ठा तक प्रयास करें। गैरसैंण और ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करना सेवा की शपथ को सर्वोच्च सम्मान देकर जन-भावनाओं को आदर देना है। यह कोई अहंकार नहीं है और ना ही श्रेय प्राप्ति कि इच्छा, केवल और केवल जनादेश को सर झुका कर मानना, मन और हृदय के भावों को एक साथ पिरो कर दायित्व के फलक पर ऐसा इंद्रधनुष खींच देना जो असम्भव सा लगता था। जिस स्वप्न को साकार की उम्मीद भी नहीं थी, पीढ़ियां मर गई, खप गई, राज्य की महान जनता ने ऐतिहासिक आंदोलन किया, दमन की पराकाष्ठा देखी।
           उन शहीदों के सपनों को उनके एक सेवक ने उन्हीं के नाम समर्पित किया। ऐसा सेवक जिसने अपने स्व को किनारे रख अपने प्रदेश के सुंदर भविष्य, सम्मानजनक पहचान के आकाश में एक ऐसा अमिट हस्ताक्षर कर दिया जिस पर आने वाले समय में सभी लोग चलेंगे, उस लकीर को आगे बढ़ाएंगे, उस पथ को संवारेंगे।
         9 नवंबर 2000 को शहीदों के त्याग और जनता के संघर्ष को स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई जी ने सम्मान देकर पृथक राज्य उत्तराखंड की स्थापना की थी। वैसा ही उल्लास मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हर उत्तराखंडी के मन और हृदय में चार मार्च 2020 को भर दिया।  शत-शत अभिनंदन, शत शत वंदन!
लेखक (रमेश भट्ट) मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार है

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