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गंगोत्री धाम क्षेत्र में अभी भी बने है बड़े हिमखंड, चारधाम यात्रा में तीर्थयात्री भी कर सकेंगे दीदार

सर्दियों में कई दौर की बर्फबारी के चलते गंगोत्री धाम क्षेत्र में भारी बर्फ जमा है। 26 अप्रैल को गंगोत्री मंदिर के कपाट खुल रहे हैं। ऐसे में शुरूआती यात्रा सीजन में यहां पहुंचने वाले तीर्थयात्री एवं पर्यटक हिमखंडों का दीदार कर सकेंगे।

गंगोत्री हाईवे पर धराली से जांगला के बीच चांगथांग समेत तीन हिमखंड पसरे हुए हैं। चांगथांग में ग्लेशियर और भैरोंघाटी के पास भूस्खलन से अवरुद्ध गंगोत्री हाईवे पर बीआरओ के जवान यातायात बहाली के प्रयास में जुटे हैं।

बीते दिन धराली से आगे हिमखंडों को लांघते हुए पैदल गंगोत्री धाम पहुंचे तीर्थ पुरोहितों एवं पर्यटकों ने बताया कि इस बार सर्दियों में गंगोत्री धाम क्षेत्र में हुई कई दौर की बर्फबारी के बाद अब खुशगवार हुए मौसम में यहां का नजारा देखने लायक है।

गंगोत्री व्यापार मंडल अध्यक्ष सतेंद्र सेमवाल, सुमन सेमवाल, माधव सेमवाल, मोहन शर्मा आदि ने बताया कि सुक्की से आगे हर्षिल गंगोत्री घाटी हिमाच्छादित है। धराली से जांगला के बीच तीन विशाल हिमखंड आए हैं। इसमें दो को काटकर हाईवे खोला जा चुका है और चांगथांग में बीआरओ के जवान गंगा भागीरथी तक पसरे विशाल हिमखंड को काटकर यहां यातायात बहाली के प्रयास में जुटे हैं।

शीतकाल में गंगोत्री मंदिर की देखरेख कर रहे मनोहर सेमवाल एवं प्रेम बहादुर ने बताया कि मार्च में कुछ दिन बर्फबारी को छोड़ शेष समय धाम में भी चटक धूप से मौसम खुशगवार हो गया है।

कनखू बैरियर स्थित कनक गुफा में रहने वाले हिकमत सिंह बुटोला ने बताया कि गंगोत्री से कनखू बैरियर के बीच रास्ता बर्फ से पटा है, लेकिन इस हिस्से में कोई बड़ा ग्लेशियर नहीं आने और रास्ता दुरुस्त होने से आवाजाही में किसी तरह की दिक्कत नहीं है।

महिला के सिर पर आ गिरा चट्टान से छिटका पत्थर, मौत

गोपेश्वर में महिला के सिर पर पत्थर गिरने से उसकी मौत हो गई है। जिला मुख्यालय के समीप गंगोलगांव की सुबधा देवी (48) पत्नी स्व. जसपाल सिंह बृहस्पतिवार को सुबह अन्य महिलाओं के साथ मवेशियों को हरी घास लेने जंगल गई थी।

जंगल में छिपाड़ ढुंगा तोक में घास काटते वक्त अचानक चट्टान से छिटका पत्थर उसके सिर पर आ गिरा। जिससे मौके पर ही महिला ने दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे।

इस घटना से गांव मे मातम पसर गया है। सुबधा देवी की मौत के बाद उनके दो बेटे मनीष बिष्ट व अनूप बिष्ट अनाथ हो गये हैं। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से अनाथ बच्चों के जीवन यापन के लिए आर्थिक सहायता दिये जाने की मांग की है।

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