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कोटद्वार: प्रशासन की उदासीनता के चलते जर्जर हुआ मिनी स्टेडियम, असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

कोटद्वार: उत्तराखंड सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए चाहे लाख दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है. युवा खिलाड़ी खेलों के जरिए अपने जिले और प्रदेश के साथ ही देश का नाम तो रोशन कर रहे हैं. ये खिलाड़ी अपनी प्रतिभाओं को और निखार सकें इसके लिए प्रैक्टिस के लिए अच्छे स्टेडियम की व्यवस्था नहीं है.

कहीं स्टेडियम हैं लेकिन उनका उचित रखरखाव नहीं हो रहा है. इस कारण ये खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं. कोटद्वार में बना मिनी स्टेडियम इसकी बानगी है. प्रशासन की उदासीनता के चलते यह स्टेडियम पूरी तरह से बदहाल हो चुका है. लोगों ने बताया कि वर्तमान में यह स्टेडियम जुआंरियों और शराबियों का अड्डा बना हुआ है.

कोटद्वार के मोटाढंक स्थित मिनी स्टेडियम की तस्वीरों को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में सरकार खेलों के प्रति कितनी जागरुक है. साल 2003 में इस मिनी स्टेडियम की नींव रखी गई थी, जिसके निर्माण कार्य में करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे.

ताकि स्थानीय खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने में किसी प्रकार की रुकावट न हो और वो अपनी तैयारी ठीक तरह से कर सकें, लेकिन पूरे 17 साल बीत जाने के बावजूद भी इस मिनी स्टेडियम की हालत जस की तस बनी हुई है. प्रशासन की उदासीनता के चलते न तो इसके रखरखाव की कोई उचित व्यवस्था नहीं है. मिनी स्टेडियम जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है.

एक खिलाड़ी के मुताबिक यह स्टेडियम इन दिनों शराबियों और जुआरियों का अड्डा बन चुका है, जिससे खिलाड़ियों को परेशानी हो रही है. खिलाड़ी ने बताया कि कई खिलाड़ी यहां आने से भी कतराते हैं. इतना ही नहीं यहां के शौचालय की हालत बहुत ही जर्जर हो चुकी है. साथ ही पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है.

वहीं, पूर्व प्रधान का कहना है कि जिस उद्देश्य से इस स्टेडियम का निर्माण हुआ था, वह उद्देश्य अभी पूरा नहीं हुआ है. ऐसे में पूर्व प्रधान ने राज्य सरकार से स्टेडियम की हालत जल्द संवारने की मांग की है.

वहीं इस मामले में स्थानीय निवासी संदीप नेगी का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी अभी तक स्टेडियम का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है. नेगी का कहना है कि जिस उद्देश्य से इस स्टेडियम का निर्माण कराया गया है, उस पर अभी अभी खरा नहीं उतरा है.

खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए दूरदराज के स्टेडियम की ओर रुख करना पड़ रहा है. जो खिलाड़ी हॉकी, क्रिकेट, कबड्डी, वॉलीबॉल या फिर फुटबॉल खेलने आते हैं वो असामाजिक तत्वों के चलते नहीं खेल पाते. उन्होंने कहा कि न तो सरकार ने यहां कोई सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और न ही मूलभूत सुविधाए मुहैया कराई हैं.

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