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जानिए- क्या है CAA? क्यों इस बिल से मचा देश में बवाल

नई दिल्ली,CAA (नागरिकता संशोधन कानून, 2019) को लेकर देश भर में कोहराम मचा हुआ है। CAA को भारतीय संसद में 11 दिसंबर, 2019 को पारित किया गया, जिसमें 125 मत पक्ष में थे और 105 मत विरुद्ध। राष्ट्रपति द्वारा इस विधेयक को 12 दिसंबर को मंजूरी भी दे दी गई।

मोदी सरकार और उसके समर्थक जहां इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष, मुस्लिम संगठन द्वारा इसका विरोध किया जा रहा हैं।

हालांकि, इस बिल को लेकर कई विश्वविद्यालयों में छात्र भी विरोध प्रदर्शन करने लगें, लेकिन जामिया मिलिया इस्लामिया में शुरू हुआ विरोध संघर्ष में बदल गया। जहां इसके बाद तो पूरे देश में काफी सारी विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

CAA के पारित होने के साथ ही उत्तर-पूर्व, पश्चिम बंगाल और नई दिल्ली सहित पूरे देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। छात्र, नेता और साथ में कुछ अन्य लोग भी, जिनपर हिंसा भड़काने के आरोप है।

हालांकि, इससे राष्ट्रीय राजधानी ठप पड़ गई। जामिया मिलिया इस्लामिया बवाल के बाद दिल्ली के कई और इलाकों में उपद्रवियों ने हंगामा मचाया।

इनमें सीलमपुर और जाफराबाद इलाकों में पुलिस पर भारी पत्थरबाजी की गई। इससे पहले भी झड़पें हुईं और सार्वजनिक बसों में आग तक लगाई गई।

वहीं, गुरुवार को भी दिल्ली में प्रदर्शन चल रहा है। कई इलाकों में धारा 144 लगाई गई और इंटरनेट भी बंद है। मेट्रो भी प्रभावित है। इसके अलावा लखनऊ में भी आगजनी हुई है। तो आइए समझते हैं कि CAA?और इस मुद्दे पर देश में उबाल क्यों है।

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA का फुल फॉर्म Citizenship Amendment Act है। ये संसद में पास होने से पहले CAB यानी (Citizenship Amendment Bill) था। फिर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद ये बिल नागरिक संशोधन कानून (CAA, Citizenship Amendment Act) यानी एक्ट बन गया है।

CAA नागरिकता संशोधन कानून , 2019, अल्पसंख्यकों (गैर-मुस्लिम) के लिए भारतीय नागरिकता देने का रास्ता खोलता है। इस कानून से भारत के किसी भी धर्म के शख्‍स की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी।

ये कानून सिर्फ पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान में रहने वाले शोषित लोगों को भारत की नागरिकता हासिल करने की राह आसान करता है। भारत के मुस्लिमों या किसी भी धर्म और समुदाय के लोगों की नागरिकता को इस कानून से खतरा नहीं

CAA में छह गैर-मुस्लिम समुदायों – हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी से संबंधित अल्पसंख्यक शामिल हैं। इन्हें भारतीय नागरिकता तब मिलेगी जब वे 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर गए हों।

इस संशोधन बिल के आने से पहले तक, भारतीय नागरिकता के पात्र होने के लिए भारत में 11 साल तक रहना अनिवार्य था। नए बिल में इस सीमा को घटाकर छह साल कर दिया गया है।

कानून में हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाने की बात की गई है। हालांकि, इससे भारत में रह रहे मुस्लिमानों को कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन उनका मानना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिम लोगों को नागरिकता देने की बात कही गई है। इसलिए ये धार्मिक भेदभाव वाला कानून है जो कि संविधान का उल्लंघन करता है।

गृहमंत्री अमित शाह ने बताया था कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश मुस्लिम देश हैं। वहां धर्म के नाम पर मुस्लिम उत्पीड़ित नहीं होते, इसलिए उन्हें इस एक्ट में शामिल नहीं किया गया है।

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