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वनाधिकारों पर विधायकों को जागर लगाकर जगाएंगे किशोर उपाध्याय

देहरादून,   अगले वर्ष 2020 में हर विधान सभा क्षेत्र व जिला स्तर पर वनाधिकार इकाइयों का गठन किया जाएगा। वनों पर हक-हकूक समेत कई मांगों को लेकर विधायकों को जगाने के लिए वनाधिकार आंदोलन की ओर से अगले बजट सत्र में विधानसभा के समक्ष डौंर-थाली बजाकर और जागर लगाकर विधायकों को जगाया जाएगा।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वनाधिकार आंदोलन से जुड़े किशोर उपाध्याय ने उत्तराखंड आंदोलन के प्रणेता इंद्रमणि बडोनी और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की जयंती अवसर पर वर्ष 2020 के वनाधिकार आंदोलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि अभी तक वनाधिकार आंदोलन के 15 विधानसभा क्षेत्र संयोजक बनाए जा चुके हैं।

कहा कि वनाधिकार युवा सेना, महिला सेना, छात्र सेना और उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सेना इकाइयों का गठन किया जाएगा। संसद में सभी संसदीय दलों के मुखियाओं और राष्ट्रीय दलों के अध्यक्षों से भेंट की जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी विधायकों से वनाधिकारों के प्रस्ताव विधानसभा से पारित करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि इसके तहत 70 विधानसभा क्षेत्रों, 13 जिलों में वनाधिकार आंदोलन इकाइयों के सम्मेलन होंगे। हर गांव में पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की जन्मभूमि से अखोड़ी से धारचूला तक पदयात्रा प्रस्तावित है।

साथ ही प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के सामने भी बात रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि झारखंड में जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर हेमंत सोरेन ने जनता का विश्वास जीता। कांग्रेस ने भी झारखंड में इन्हीं मुद्दों पर चुनाव लड़ा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी वनाधिकार के मुद्दे को आगे बढ़ा रहे हैं। वनाधिकार आंदोलन के तहत दिल्ली की तर्ज पर उत्तराखंड में जनता को मुफ्त पानी, बिजली व रसोई गैस समेत दस सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत है।

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