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उत्तराखंड के पर्वतीय सीमांत गांवों में जल्द मिलेगी BSNL इंटरनेट की फोर जी सेवा

उत्तराखंड (Uttarakhand) सीमांत गांवों में रहने वालों के लिए अच्छी खबर। राज्य के जिन 465 गांवों में अभी तक फोर-जी की सुविधा नहीं हैं. उन गांवों में इस साल के आखिर तक बीएसएनएल इसकी सुविधा मुहैया कराएगा. बीएसएनएल (BSNL) के मुख्य महाप्रबंधक प्रमोद कुमार जैन ने बुधवार को राजभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर) गुरमीत सिंह से मुलाकात की और उत्तराखंड के सीमांत गांवों के लिए शुरू होने वाली योजनाओं के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बीएसएनएल के प्रस्तावित विकास परियोजनाओं और मौजूदा नेटवर्क के बारे में भी राज्यपाल को बताया.

राज्यपाल ने बीएसएनएल अधिकारियों से कहा कि वे सुरक्षा जरूरतों के कारण राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में नेटवर्क बढ़ाएं. ताकि आम लोगों के साथ ही यहां पर तैनात सुरक्षा बलों को भी इसका लाभ मिल सके. राज्य ने बीएसएनएल के अफसरों से कहा कि सीमा में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात हैं और साथ ही कई गांव भी हैं. जहां अभी फोर जी की सुविधा नहीं है. जिसके कारण उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. लेकिन इन सीमांत गांवों में संचार नेटवर्क की आवश्यकता है. राज्यपाल ने कहा कि इन क्षेत्रों में नए मोबाइल वर लगाकर संचार सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए वहीं सीजीएम जैन ने बताया कि दिसंबर के अंत तक उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में बीएसएनएल द्वारा 4जी सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी.

वहीं बीएसएनएल के अफसरों ने राज्यपाल को बताया कि चारधाम यात्रा मार्ग, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पर सैटेलाइट लिंक के जरिए मोबाइल सेवा दी जा रही है और जल्द ही यहां पर इंटरनेट की सुविधा दी जाएगी. अभी तक इन इलाकों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है. उन्होंने कहा कि जल्दी ही चार धाम के लिए इंटरनेट की सुविधा दी जाएगी और इससे यहां आने वाले यात्रियों को फायदा मिलेगा.

राज्य के 465 सीमांत गांवों में नहीं है फोर-जी सुविधा

राज्य में ज्यादातर गांवों में अब फोर-जी की सुविधा है. लेकिन राज्य के 465 सीमांत गांवों में इसकी सुविधा नहीं है. लिहाजा बीएसएनएल का दावा है कि इस साल के आखिर तक इन गांवों में फोर-जी की सुविधा मिल जाएगी और इसके लिए तैयारी की जा रही है और दिसंबर तक ये सुविधा सीमांत गांवों में मिलने लगेगी.

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