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पेगासस जासूसी मामले में जनता से राय मांगेगा जांच आयोग- SC

जासूसी के लिए इजरायली स्पाइवेयर पेगासस (Pegasus Panel) के कथित इस्तेमाल की जांच कर रहे सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) द्वारा नियुक्त पैनल ने 31 मार्च तक जनता से 11 सवालों पर टिप्पणी मांगी है. सवालों में यह शामिल है कि क्या राज्य निगरानी की सीमाएं अच्छी तरह से परिभाषित और समझी गई हैं और अगर किसी को लक्षित निगरानी के अधीन किया जाता है तो शिकायत निवारण तंत्र क्या होना चाहिए. अक्टूबर में, अदालत ने जासूसी के आरोपों की जांच के लिए समिति का गठन (Organizing committee) किया. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरवी रवींद्रन समिति के प्रमुख हैं.

आर रवींद्रन पैनल में गांधीनगर के राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नवीन कुमार चौधरी, केरल की अमृता विश्व में इंजीनियरिंग पढ़ाने वाले प्रभारण पी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे में कंप्यूटर विज्ञान व इंजीनियरिंग के एक सहयोगी प्रोफेसर अश्विन अनिल गुमस्ते शामिल हैं. जांच का आदेश उन याचिकाओं के जवाब में दिया गया था, जिसमें निजता के अधिकार के उल्लंघन को उजागर किया गया था और यह भी कहा गया है कि यह अत्याधुनिक जासूसी सिस्टम इस्राइल की कंपनी ने सिर्फ सरकारों और उनकी एजेंसियों को ही बेचे थे.

अक्टूबर 2001 को हुआ था कमेटी का गठन

पेगासस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2021 को एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आरवी रवींद्रन को इसका अध्यक्ष बनाया गया था. कमेटी गठित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हर किसी की प्राइवेसी की रक्षा होनी चाहिए.इससे पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में इस मामले पर सुनवाई की थी. उस समय कोर्ट ने भारत में कुछ लोगों की निगरानी के लिए इजराइली स्पाइवेयर का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों का तीन सदस्यीय एक पैनल गठित करने का आदेश दिया था.

अब प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने 12 जनहित याचिकाओं को 23 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था. इनमें ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’, पत्रकारों-एन राम और शशि कुमार की याचिकाएं भी शामिल हैं. इस दौरान उस रिपोर्ट की समीक्षा भी की जा सकती है, जिसे शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त पैनल को दाखिल करने को कहा गया था.

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