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रुद्रप्रयाग में ऊर्जा संरक्षण की दी गई जानकारी

[दिलबर सिंह बिष्ट ]रुद्रप्रयाग :  पुराने विकास भवन में 13 दिवसीय संचालित यंग फार्मर स्कूल मेें उपस्थित युवाओं को ऊर्जा दक्ष कृषि पम्प सैट एवं ऊर्जा संरक्षण की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने बताया कि यदि सम्पूर्ण सौर विकिरण का उपयोग कर लिया जाये तो विश्व में उपयोग की जा रही सम्पूर्ण ऊर्जा की आपूर्ति सौर ऊर्जा से ही प्राप्त हो जाएगी। कहा कि सौर ऊर्जा सूर्य से प्राप्त एक अक्षय स्त्रोत व पर्यावरण अनुकूल है।

सूर्य से प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा विस्तारित, अप्रदूषणकारी व अक्षुण है। इसका उपयोग अनाज सुखाने, कृषि यंत्र चलाने, खाना पकाने, जल ऊष्मन व अन्य घरेलू कार्यो में भी किया जाता है।

वर्तमान में सर्वाधिक ऊर्जा की प्राप्ति कोयले के खुदान से प्राप्त होती है, जो कि अनंवीकरणीग ऊर्जा है। समय की माँग व आपूर्ति के हिसाब से सौर ऊर्जा एक अच्छा विकल्प है। यह निरन्तर प्राप्त होने वाली ऊर्जा है।

के.वी.के. वैज्ञानिक डाॅ दिनेश चैरासिया ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा युक्त छोटे संयत्र जैसे सोलर पावर स्प्रेयर, सोलर वाइल्ड एनिमल रिपलेन्ट, सोलर स्प्रिन्कलर पम्प, सोलर ड्रिप इंटीग्रेशन पम्प का प्रयोग कर काफी हद तक कृषि श्रम व डीजल/पेट्रोल से चलने वाले यन्त्रों में हो रहे धन व समय की खपत को कम किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त पवन चक्की/जल से चलने वाली चक्कियों के प्रयोग से काफी हद तक विद्युत खपत को भी कम किया जा सकता है। असिंचित क्षेत्रों में जहाँ पानी पहुंचना कठिन है वहाँ पूसा हाइड्रो जैल का उपयोग काफी लाभकारी रहा है। परियोजना उरेडा संदीप सैनी ने ऊर्जा के संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर निदेशक आरसेटी दिनेश चन्द्र, मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ रमेश नितवाल, मुख्य कृषि अधिकारी एस.एस वर्मा सहित प्रशिक्षु उपस्थित थे।

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