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भारत तीसरा बड़ा इम्पोर्टर, फिर भी Drone के आयात पर सरकार ने लगाया प्रतिबंध

केंद्र सरकार ने ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. ये प्रतिबंध 9 फरवरी से लागू हो गया है. इसका मतलब ये हुआ कि अब विदेशों से ड्रोन नहीं खरीदे जाएंगे. हालांकि, रिसर्च-डेवलपमेंट, डिफेंस और सुरक्षा के मकसद से ड्रोन का आयात हो सकेगा. सरकार का कहना है कि इससे देश में ही ड्रोन मैनुफैक्चरिंग (Drone Manufacturing) को बढ़ावा मिलेगा.

कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के अंतर्गत आने वाले डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने ड्रोन के आयात पर पाबंदी लगाने वाला नोटिफिकेशन बुधवार को जारी कर दिया. नोटिफिकेशन के मुताबिक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डिफेंस और सुरक्षा के मामलों को छोड़कर बाकी किसी भी मकसक से ड्रोन का आयात नहीं हो सकेगा.

इस नोटिफिकेशन में ये भी कहा गया है कि अगर आरएंडडी, डिफेंस और सुरक्षा के मकसद से ड्रोन आयात होगा तो उसके लिए ड्यू क्लियरेंस लेना जरूरी होगा. हालांकि, अगर कोई ड्रोन कंपोनेंट्स आयात करना चाहता है तो उसके लिए क्लियरेंस की जरूरत नहीं होगी.

देश की ड्रोन इंडस्ट्री (Drone Industry) को बढ़ावा देने के मकसद से पिछले साल अगस्त में सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने नियमों में ढील दी थी. बजट 2022-23 में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने ड्रोन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन शक्ति का ऐलान किया है. इसमें ड्रोन तकनीक का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ाने की बात कही गई है.

जानकारों का मानना था कि जब तक ड्रोन का आयात जारी रहेगा, तब तक देश की ड्रोन इंडस्ट्री को बहुत ज्यादा बढ़ावा मिलना मुमकिन नहीं है. इसलिए अब जाकर सरकार ने ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. इससे घरेलू ड्रोन इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा.

तीसरा बड़ा ड्रोन इम्पोर्टर है भारत

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, भारत ने 1998 में इजरायल से अपना पहला अनआर्म्ड व्हीकल (UAV) यानी ड्रोन खरीदा था. अब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ड्रोन इम्पोर्टर है. सबसे ज्यादा ड्रोन आयात करने के मामले में यूके और फ्रांस के बाद तीसरे नंबर पर भारत है.

कितनी बड़ी होगी भारत की ड्रोन इंडस्ट्री?

जनवरी 2022 में सरकार की ओर से जारी एक दस्तावेज में बताया गया था कि अगले तीन साल में ड्रोन और ड्रोन कंपोनेंट्स मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री में 5 हजार करोड़ का निवेश आने की संभावना है. 

दस्तावेज के मुताबिक, ड्रोन मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री का सेल्स टर्नओवर 2020-21 में 60 करोड़ रुपये रहा, जो 2023-24 में बढ़कर 900 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. अगले तीन साल में ड्रोन मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री में 10 हजार से ज्यादा नौकरियां आने की भी उम्मीद है.

इतना ही नहीं, ड्रोन सर्विस इंडस्ट्री में बड़ा बूम आने की संभावना है. इसमें ऑपरेशन, लॉजिस्टिक और ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी सर्विसेस शामिल हैं. अनुमान है कि अगले तीन साल में ड्रोन सर्विस इंडस्ट्री 30 हजार करोड़ रुपये होगी. इसके साथ ही तीन साल में इस इंडस्ट्री में 5 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी है.

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