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योग को धर्म या पूजा पद्धति से जोड़ना गलत

कोटद्वार, महर्षि कण्व की तपोस्थली कण्वाश्रम (कोटद्वार) स्थित वैदिक गुरुकुल महाविद्यालय में पांच-दिवसीय मुस्लिम योग-साधना शिविर शुरू हो गया।

शिविर का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि योग को धर्म विशेष अथवा पूजा पद्धति से जोड़ना पूरी तरह गलत है।

योग सबका है और तन-मन को स्वस्थ रहने के लिए इसका अभ्यास सभी को करना चाहिए। इस मौके पर उन्होंने महाविद्यालय परिसर में स्थापित ‘भरत स्मारक’ का लोकार्पण भी किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में स्वीकार्य है। इसलिए धर्म विशेष के नाम पर योग से दूर रहना पूरी तरह गलत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देश की जनता को लगातार यही संदेश दे रहे हैं। कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े तमाम संस्थानों में योग शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है, ताकि लोग दवाओं के बजाय योग से स्वस्थ हो सकें।

कण्वाश्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कण्वाश्रम की ऐतिहासिकता एवं पौराणिकता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने इस भूमि को स्वच्छ आइकॉनिक स्थल के रूप में विकसित करने निर्णय लिया। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि कोटद्वार का नाम कण्वनगरी कोटद्वार किए जाने संबंधी प्रस्ताव को कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा।

उन्होंने कलालघाटी का नाम कण्वघाटी किए जाने के संबंध में नगर निगम को प्रस्ताव तैयार करने के भी निर्देश दिए।

परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि आज योग के अर्थ और शक्ति को समझने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने योग की शक्ति को समझा और अब 190 देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। कहा कि योग धर्म एवं समुदाय में बंधा हुआ नहीं है, बल्कि सभी धर्मों को आपस में जोडऩे का काम करता है।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने कहा कि विश्व के तमाम देश योग को अपना रहे हैं।

राम मंदिर का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद भी देश में सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ा है। इस मौके पर वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत व गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष पं. राजेंद्र अणथ्वाल भी मौजूद रहे।

शिविर के पहले दिन वैदिक गुरुकुल महाविद्यालय के ब्रह्मचारियों के अलावा आसपास के स्थानों से आए मुस्लिम समुदाय के लगभग 30 बच्चों ने विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया।

महाविद्यालय के कुलपति योगीराज डॉ. विश्वपाल जयंत (आधुनिक भीम) ने उन्हें प्राण पावर योग, वज्रासन, शशांकासन, जागो शीर्षासन, मयूरासन, पद्मासन, शेरासन आदि यौगिक क्रियाओं का अभ्यास कराया।

शिविर में कनाडा से आए योग प्रशिक्षु भी शामिल हुए। योगीराज डॉ. जयंत ने बताया कि आने वाले दिनों में मुस्लिम समुदाय के लोग काफी संख्या में शिविर में शामिल होंगे।

गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार से 13 किमी दूर महर्षि कण्व की तपोस्थली एवं चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा।

कण्वभूमि से जहां एक ओर सांप्रदायिक सौहार्द की बयार बही, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के बच्चों ने योग क्रियाओं में भाग लेकर संदेश दिया कि योग धर्म-समुदाय की सीमाओं से परे शरीर को स्वस्थ रखने का एकमात्र सवरेत्तम साधन है।

वैदिक गुरुकुल महाविद्यालय में एक ओर सुबह से ही वेद ऋचाओं के बीच यज्ञ में आहुतियां पड़ रही थीं, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा कर रहे थे।

मौका था गुरुकुल के स्वर्ण जयंती वर्ष में आयोजित पांच-दिवसीय मुस्लिम योग साधना शिविर के शुभारंभ का। आयोजकों के दावे पर यकीन करें तो विश्व स्तर पर यह पहला मौका है, जब मुस्लिम समुदाय के लोग धर्म-समुदाय के बंधनों को तोड़कर हवन-यज्ञ के बीच यौगिक क्रियाओं का हिस्सा बने।

शिविर में शामिल इन लोगों का स्पष्ट कहना था कि सभी धर्म-संप्रदाय स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ विचारों का वास मानते हैं। ऐसे में उन्होंने स्वस्थ शरीर पाने के लिए यदि यौगिक क्रियाओं में भाग लिया जाए तो इसमें कुछ भी गलत नहीं।

कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भाव रखने वाला देश है और देश की अखंडता के लिए जरूरी है कि बेहतर शिक्षा कहीं भी मिले, उसे ग्रहण किया जाना चाहिए।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस आयोजन को देश में सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर बताया। आयोजकों का कहना था कि जैसे-जैसे शिविर आगे बढ़ेगा, योग प्रशिक्षुओं की तादाद भी बढ़ती चली जाएगी।

योग शिविर मुस्लिम बच्चों के साथ ही विदेशी महिलाओं ने भी प्रतिभाग किया। ऋषिकेश से पहुंचीं इन महिलाओं का कहना था कि कण्वाश्रम के बारे में उन्होंने पूर्व में कई मर्तबा सुना था। लेकिन, यहां आने का मौका पहली बार मिला। उन्होंने कण्वाश्रम के प्राकृतिक सौंदर्य की भी मुक्तकंठ से सराहना की।

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