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हल्द्वानी मेडिकल कालेज में अधूरी तैयारियों के बीच कैसे मिलेगी पीजी की अनुमति !

हल्द्वानी : राजकीय मेडिकल कालेज में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की टीम 30 मई को पहुंचेगी। टीम एमडी व एमएस सीटों की संभावना को लेकर परीक्षण करेगी, लेकिन कालेज में तैयारियां अधूरी हैं। कालेज में सबसे अधिक समस्या स्टाफ की है, जिसे पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसे लेकर जनप्रतिनिधि व नौकरशाह भी बेपरवाह हैं। इस समय राजकीय मेडिकल कालेज में इस समय एमडी व एमएस की 65 सीटें हैं।

इन विभागों का होना है निरीक्षण

मेडिकल कालेज के अनुसार 30 मई से एनएमसी का निरीक्षण प्रस्तावित है। पहले पैथोलाजी विभाग का निरीक्षण होगा। इसके बाद 31 मई व एक जून को सर्जरी एनेस्थीसिया विभाग की हकीकत परखी जाएगी। चार जून को एनेस्थीसिया विभाग और और अंत में 11जून को मेडिसिन विभाग का निरीक्षण प्रस्तावित है।

ये है स्टाफ की स्थिति

राजकीय मेडिकल कालेज में डाक्टरों की संख्या लगातार कम हो रही है। कालेज में 400 डाक्टरों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष 144 डाक्टर ही कार्यरत हैं। रेडियो डायग्नोसिस विभाग में एक भी डाक्टर नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ताला लटका हुआ है।

मेडिसिन विभाग में 30 डाक्टरों के सापेक्ष केवल चार डाक्टर ही कार्यरत हैं। इन विभागों का सामान्य संचालन तक मुश्किल हैं। ऐसे में पीजी की अनुमति कैसे मिलेगी। यह बड़ा सवाल है।

चयन होने के बाद नहीं जारी किए नियुक्त पत्र

सरकारी सिस्टम की लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है? 23 अप्रैल को राजकीय मेेडिकल कालेज प्रशासन ने 90 डाक्टरों का साक्षात्कार लिया। इसमें केवल 10 डाक्टर पहुंचे। इन सभी का चयन भी हुआ, लेकिन नियुक्ति पत्र शासन स्तर से जारी होना था। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया था। 27 जून तक नियुक्त पत्र जारी नहीं हो सका है।

प्राचार्य प्रो. अरुण जोशी ने बताया कि एनएमसी की टीम पहुंचने वाली है। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। डाक्टरों की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए प्रयास जारी हैं। उम्मीद है कि जल्द ही 10 डाक्टरों की नियुक्ति पत्र भी जारी हो सकते हैं।

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