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पीजीएफ और पीएसीएल की सील संपत्तियों की कैसे हो गई रजिस्ट्री, तहसीलों की भूमिका संदेह के घेरे में

देहरादून। पर्ल्स ग्रीन फोर्ट लिमिटेड (पीजीएफ) और पर्ल्स एग्रोटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) की सील संपत्तियों को बेचने के मामले में देहरादून व विकासनगर तहसीलों की भूमिका संदेह के घेरे में है। उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स की ओर से अब तक की गई जांच में सामने आया है कि दोनों तहसीलों में वर्ष 2021 में जनवरी से जुलाई तक सात सील जमीन की रजिस्ट्रियां की गई।

सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित समिति ने 2016, 2017 और 2021 को महानिरीक्षक पंजीकरण उत्तराखंड को पत्र भेजकर सूचित किया था कि देशभर में पीजीएफ की 348 और पीएसीएल की 14000 संपत्तियों को सील किया गया है। ऐसे में इन संपत्तियों को बेचा न जाए। इसके बावजूद तहसीलों में इन आदेशों की अवेहलना की गई और सात रजिस्ट्रियां की गई। यह रजिस्ट्रियां वह हैं जो प्राथमिक जांच में सामने आई हैं। ऐसी और रजिस्ट्रियां होने की भी आशंका है। करोड़ों रुपये का घपला सामने आने के बाद अब एसटीएफ ने प्रवर्तन महानिदेशालय (ईडी) को भी पत्र भेजा है। आने वाले दिनों में ईडी की ओर से भी कार्रवाई की जा सकती है।

गौर हो कि 11 सदस्यीय गिरोह ने सर्वोच्च न्यायालय और भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) के फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये की पीजीएफ और पीएसीएल की सील संपत्ति को बेच दिया। आरोपितों की ओर से 100 करोड़ से ज्यादा कीमत की 160 बीघा जमीन बेचने का अनुमान है।

नेहरू कालोनी में हुआ था मुकदमा, नहीं हुई कार्रवाई

सील जमीन बेचने के एक मामले में 15 दिसंबर 2021 को देहरादून के रहने वाले हितेश अरोड़ा ने आरोपित पूजा मलिक व संजीव मलिक के खिलाफ 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाया था। हाईप्रोफाइल मामला होने के बावजूद नेहरू कालोनी पुलिस ने इस मामले में मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया। अब जब एसटीएफ ने मामले का पर्दाफाश किया तो शुक्रवार को वी मुरुगेशन अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था ने सीओ नेहरू कालोनी अनिल जोशी व मामले के विवेचक को तलब किया। इस मामले में सीओ जोशी ने बताया कि आरोपितों को एसटीएफ की ओर से गिरफ्तार किया गया है। अब उन्हें रिमांड पर लिया जाएगा।

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