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उत्तराखंड में 856 बंदियों की रिहाई के बाद भी राहत की उम्मीद कम, जेलों में क्षमता से अधिक कैदी

देहरादून। उत्तराखंड की जेलों से 856 बंदियों की पैरोल पर रिहाई के बाद भी राहत की उम्मीद कम है। बानगी के तौर पर देहरादून जिला कारागार में इन दिनों करीब तेरह सौ बंदी रखे गए हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद यहां से 120 बंदी पैरोल पर छोड़े जाने हैं। मगर इसके बाद भी यहां करीब पौने 12 सौ बंदी रहेंगे, जबकि जेल की कुल क्षमता 580 बंदियों की है। कमोबेश यही स्थिति सूबे की सभी जेलों की है। जानकर हैरानी होगी कि सूबे की जेलों में कुल 3188 बंदियों के सापेक्ष साढ़े पांच हजार से अधिक बंदी रखे गए हैं।

सूबे के आठ जिलों में स्थापित जेल बंदियों के बोझ से कराह रही हैं। हल्द्वानी, देहरादून और हरिद्वार की जेलों में तो क्षमता से ढाई से तीन गुने अधिक बंदी रखे गए हैं। ऐसे में अगर कोरोना वायरस ने जेल की चहारदीवारी लांघी तो हालात संभालना मुश्किल होगा। हकीकत यह है कि आम दिनों में इन जेलों में सामान्य व्यवस्था बनाए रखने में कारागार प्रशासन को नाकों चने चबाने पड़ जाते हैं। ऐसे में तब क्या होगा, जब कैदियों तक यह संक्रमण पहुंचेगा।

सूबे के पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार कहते हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के क्रम में अभी उन कैदियों को पैरोल पर छोड़ा जा रहा है। जो बीमार हैं या सजा का बड़ा हिस्सा पूरा कर चुके हैं। जेल में बच रहे बंदियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच के साथ उनमें निर्धारित दूरी बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही जेलों में सैनिटाइजेशन भी किया जा रहा है।

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