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स्वास्थ्य कर्मियों को PPE किट पहनने की नहीं जरूरत-AIIMS निदेशक रणदीप गुलेरिया

नॉन-आईसीयू वार्ड में कोविड-19 पेशेंट्स की देखभाल के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों (Healthcare workers) को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) पहनने की जरूरत नहीं है. AIIMS के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया (Dr Randeep Guleria) का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क और फेस शील्ड काफी हैं. गुलेरिया ने कहा कि हेल्थवर्कर ज्यादा सुरक्षा के लिए कोई ग्लव्स और गाउन का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन पीपीई किट (Personal Protective Equipment) की कोई जरूरत नहीं है.

रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोविड-19 का कारण बनने वाला वायरस तब फैलता है जब लोग वायरस से युक्त बूंदों और कणों से दूषित हवा में सांस लेते हैं. महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान दुनिया भर के अस्पतालों में हेल्थवर्कर्स द्वारा पीपीई किट का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था. गुलेरिया ने कहा, आईसीयू में अभी भी कोविड-19 मरीजों का इलाज करने के दौरान पीपीई किट पहनने की जरूरत हो सकती है, लेकिन नॉन आईसीयू में इसकी जरूरत नहीं है, क्योंकि अपडेटेड इंटरनेशनल गाइडलाइंस अब इनके इस्तेमाल को जरूरी वहीं ठहराते.

पीपीई किट की नहीं जरूरत

एम्स में माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर डॉ आरती कपिल ने भी हाल ही में आयोजित एक सेमिनार में कहा था कि सामान्य तौर पर कोविड मरीजों की देखभाल के लिए कवरऑल (पीपीई किट) की जरूरत नहीं है. वहीं, उजाला सिग्नस ग्रुप के अस्पतालों के फाउंडर डायरेक्टर डॉ शुचिन बजाज ने कहा, ‘पीपीई किट का इस्तेमाल पहली और दूसरी कोविड लहरों में काफी देखा गया था. हमें अभी इसकी तत्काल जरूरत नहीं दिख रही है क्योंकि नया वेरिएंट अभी डेवलप हो रहा है.’

दूषित हवा में सांस लेने से होता है संक्रमण

उन्होंने कहा, ‘बहुत सारे अध्ययनों में यह साफतौर से दिखाया गया है कि कोविड-19 तब फैलता है जब लोग वायरस युक्त बूंदों और छोटे हवा के कणों से दूषित वायु में सांस लेते हैं. फोमाइट्स (वस्तुएं और सामग्री जिनमें संक्रमण होने की संभावना होती है) की संक्रमण फैलाने में ज्यादा भूमिका नहीं होती.’ बजाज ने कहा, ‘हमें शुरुआत में डर था कि वायरस सब्जियों से फैल जाएगा, लेकिन यह उस तरह नहीं फैलता है. इसलिए पीपीई किट की ज्यादा भूमिका नहीं होगी और मास्क या फेस शील्ड की ज्यादा जरूरत होती है.’ पीपीई किट महंगे हैं और महामारी के शुरुआती चरण के दौरान ये आसानी से नहीं मिलते थे. स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई किट की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. तेज गर्मी में पीपीई पहने रखना हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए एक बड़ा चैलेंज होता था.

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