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गैरसैंण में सत्र न कराने को लेकर पूर्व CM हरीश रावत ने गैरसैंण में दिया धरना

चमोली। स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर गैरसैंण में सियासी पारा गरम रहा। मुख्यमंत्री के हालिया बयान गैरसैंण में ठंड लगती है को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत भारी संख्या में एकत्र दिग्गज कांग्रेस नेताओं सहित धरने पर बैठे और दिनभर उपवास रखा।

रामलीला मैदान में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राजनीतिक जीवन में मैंने कभी कोई निर्णय गुस्से में नहीं लिया किन्तु उन्हें शिकायत है कि पूर्व सरकार के जनहित में जारी 200 योजनाओं को पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। मेरा वृक्ष मेरा धन, मेरा गांव मेरी सड़क जैसी जनता से सीधे जुड़ी योजनाओं को बंद किया जाना कतई उचित नहीं माना जा सकता है। गैरसैंण को सारे प्रदेश को जोड़ने के लिए अवस्थापना निर्माण विभाग गठित किया, लेकिन तीन वर्षों से उस पर भी काम ठप है।

उत्तराखंड अर्बन डेवलपमेंट टाउन का सपना भी गढ़ा था। भराड़ीसैंण में 500 आवासीय भवनों का कार्य शुरू किया। 47 करोड़ का बजट सचिवालय के लिए निर्गत किए, लेकिन वो सारा पैसा कहां गया किसी को पता नहीं। रावत ने कहा कि पहाड़ी प्रदेश है तो ठंड तो होगी ही। पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ.अनसूया प्रसाद मैखुरी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने विकट परिस्थितियों में गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित किए, लेकिन वर्तमान समय में सारी सुविधाओं से संपन्न विधानसभा परिसर में पहली बार सत्र का आयोजन नहीं किया गया।

पूर्व विधायक गणेश गोदियाल ने कहा कि पहाड़ी प्रदेश के मुखिया ने ठंड लगने की बात कही यह शर्मसार करती है। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष एनएसयूआइ मोहन भंडारी, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष सुमित्र भुल्ल्र, प्रदेश उपाध्यक्ष सेवादल रमेश गोस्वामी, जिला पंचायत अध्यक्ष बागेश्वर हरीश ऐठानी आदि मौजूद थे।

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