उम्मीदें

कर्णप्रयाग के वन प्रभाग भवन में स्थानीय उत्पादों का ग्रोथ सेंटर होगा स्थापित

कर्णप्रयाग: चौदह सालों से खंडहर में तब्दील हो रहे कर्णप्रयाग स्थित अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग भवन के दिन बहुरेंगे। यहां पर आजीविका सुधार के तहत जायका (जापान इंटरनेशनल कार्पोरेशन एजेंसी) की ओर से स्थानीय उत्पादों का ग्रोथ सेंटर स्थापित करेंगी। इसके लिए कार्यदायी संस्था की ओर से पुराने भवन को तोड़ने का कार्य प्रारंभ किया गया है।

गौरतलब है यहां वर्ष 2007 तक प्रभागीय वनाधिकारी उपरीगंगा वन कार्यालय वजूद में था, जिसे रुद्रप्रयाग शिफ्ट कर दिया गया था। इस कारण दोमंजिला भवन आवारा पशुओं का अड्डा बना हुआ था। अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग के अधिकारियों की माने तो बीते सप्ताह जर्जर भवन को तोड़ने का कार्य देहरादून की कार्यदायी संस्था ने शुरू कर दिया है। अब नए सिरे से यहां दोमंजिला भवन तैयार होगा, जिसमें जायका की ओर से कर्णप्रयाग विकासखंड सहित जनपद के विभिन्न विकासखंडों में गठित स्वयं सहायता समूहों की ओर से स्थानीय उत्पादों के खरीद सहित विपणन की व्यवस्था, उत्पादन बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों से खाद्य सामग्री बनाने जैसे अचार, मुरब्बा, जैम, चटनी, जूस बनाने का प्रशिक्षण भी महिला समूहों को दिया जाएगा।

वन क्षेत्राधिकारी रेंज अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग नंवल किशोर सिंह ने बताया कि लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से तैयार होने वाले उपरी गंगा वन प्रभाग के पुराने भवन को ग्रोथ सेंटर स्थापना के लिए चयन किया गया है। इसके तहत दोमंजिला भवन में पैकिग, स्टोरेज, प्रशिक्षण हाल, स्टोर, स्टाफ रूम, कैंटीन, मशीन कक्ष, स्थानीय उत्पादों के लिए लाबी, बरामदा आदि का निर्माण होना है। पांच स्थान काठगोदाम, आगराखाल, गैरसैंण, कर्णप्रयाग व बरवाकटाल में स्थानीय स्तर पर आजीविका सुधार के लिए जायका की ओर से ग्रोथ सेंटर स्थापित किए जाने हैं। इसके तहत कर्णप्रयाग में भी पुराने उपरीगंगा वन प्रभाग कार्यालय को ध्वस्तीकरण कर पुर्ननिर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की जानी है।

फिलहाल पुराने भवन को तोड़ने का कार्य प्रारंभ किया गया है। ग्रोथ सेंटर से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बाजार तक लाने के लिए एक स्थान के साथ बाजार भी मिलेगा। -सर्वेश कुमार दुबे, प्रभागीय वनाधिकारी अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग गोपेश्वर

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