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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय किनगोड़ीखाल बिना डॉक्टर का अस्पताल

धुमाकोट : पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के नाम पर चिकित्सालय तो खोल दिए गए। लेकिन, इन चिकित्सालयों में चिकित्सकों की नियुक्ति करना सरकार भूल गई। प्रखंड नैनीडांडा के अंतर्गत राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय किनगोड़ीखाल भी एक ऐसा ही स्वास्थ्य केंद्र है, जहां आज तक चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है।

कुमाऊं मंडल की सीमा से लगा गढ़वाल के जनपद पौड़ी के अंतर्गत नैनीडांडा विकासखंड का किनगोड़ीखाल क्षेत्र सुविधाओं की दृष्टि से हमेशा उपेक्षित रहा है। ब्लाक मुख्यालय नैनीडांडा अथवा तहसील मुख्यालय धुमाकोट में किसी कार्य के लिए आने का अर्थ पूरे दिन की बर्बादी होता है। इसके बाद भी कार्य होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं। कार्य पूर्ण न होने की दशा में इस क्षेत्र के वाशिदों को धुमाकोट अथवा नैनीडांडा के होटलों में किराए पर कमरा लेना पड़ता है। जिसमें पैसा और समय की बर्बादी होती है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सरकार ने कुछ वर्ष पूर्व किनगोड़ीखाल में एक आयुर्वेदिक चिकित्सालय खोला। इस चिकित्सालय पर गुजडू पट्टी के आंसों बाखल, मैंदोली, दिगोलीखाल सहित दो दर्जन से अधिक गांव निर्भर थे।

वर्षों बीत गए, लेकिन आज भी चिकित्सालय किराये के भवन में संचालित हो रहा है। इतना ही नहीं, चिकित्सालय में आज तक चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। स्टाफ के नाम पर इस चिकित्सालय में मात्र एक फार्मेसिस्ट और वार्ड ब्वाय हैं। किनगोड़ीखाल निवासी चंद्रजीत बोरा, संजय बिष्ट, कुलदीप सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक की तैनाती की मांग की है। इधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि जिले में चिकित्सकों की कमी के कारण कई चिकित्सालयों में चिकित्सक तैनात नहीं हो पाए हैं। बताया कि जैसे ही नए चिकित्सक मिलेंगे, चिकित्सकविहीन चिकित्सालयों में चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी।

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