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झूला पुल बंद होने पर चार नेपाली युवकों ने नदी में लगाई छलांग, तीन तैरकर पहुंचे नेपाल, एक लौटा

धारचूला में अंतरराष्ट्रीय झूला पुल बंद होने से नेपाली नागरिकों का सब्र टूट गया। चार युवक नेपाल जाने के लिए काली नदी में कूद गए। इनमें से तीन नेपाली तैरकर नेपाल पहुंच गए, जबकि एक नेपाल पुलिस के डर से लौट आया। तैरकर नेपाल पहुंचे तीनों नागरिकों को नेपाल पुलिस ने गिरफ्त में ले लिया है।

कोरोना के कारण भारत के विभिन्न शहरों में काम करने वाले नेपाली लोग अपने वतन लौट रहे हैं। नेपाल में भी लॉकडाउन होने के कारण झूला पुल के गेट नहीं खोले जा रहे हैं। पिछले दो दिन से सैकड़ों नेपाली धारचूला के झूलापुल के पास जमा हैं। सोमवार को इनकी संख्या लगभग 800 पहुंच गई। दिन में भीड़ में शामिल चार युवकों ने तैरकर नेपाल जाने के लिए काली नदी में छलांग लगा दी। इनमें से तीन नेपाली सुरक्षित नेपाल पहुंच गए, जबकि एक युवक तैर नहीं सका और वापस आ गया। तैरकर नेपाल पहुंचे तीनों युवकों को नेपाल पुलिस ने हिरासत में ले लिया और जांच के लिए अपने साथ ले गई।

नेपाली नागरिकों में नेपाल सरकार के खिलाफ गुस्सा दिखा। भीड़ में शामिल कई लोगों ने नेपाल की ओर पत्थर भी उछाले। एक युवक राजेंद्र सिंह ने कहा कि वह चार दिन से फंसा है। नेपाल सरकार को शीघ्र गेट खोलने चाहिए। कई महिलाएं भी शामिल हैं। ओखलढुंगा से 50 किमी पैदल चलकर धारचूला पहुंची गीता और पार्वती ने बताया रविवार रात उन्होंने किसी के घर में शरण ली।

इधर, नेपाल में लॉकडाउन के कारण गेट खुलने की कोई उम्मीद नहीं है। भीड़ से भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट हैं। पुलिस और एसएसबी नेपाली लोगों की भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखे हैं। प्रशासन ने व्यापार संघ सहित अन्य संगठनों की मदद से फंसे हुए नेपालियों के लिए भोजन की व्यवस्था की। रं म्यूजियम पहाड़ी जायका और नपल्च्यू महिला समूह की महिलाओं ने नेपाली नागरिकों के लिए राशन की व्यवस्था की। इनमें उर्मिता सनवाल, शीला ह्यांकी, लक्ष्मी नपलच्याल, गंगू, निहारिका गर्ब्याल, मोती आदि महिलाएं शामिल थीं।

नेपाल में भी लॉकडाउन चल रहा है। वहां के प्रशासन से बातचीत की जा रही है। यदि नेपाल की ओर से गेट नहीं खोला गया तो जो नेपाली यहां फंसे हैं, उनके रहने और खाने की यहीं व्यवस्था की जाएगी। अभी भी सभी फंसे नेपालियों को भोजन कराया जा रहा है।
– डॉ.विजय कुमार, डीएम पिथौरागढ़।

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