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क्या अकबर और रमानी के बीच बची है समझौते की कोई गुंजाइश?

दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर (MJ Akbar) द्वारा पत्रकार प्रिया रमानी (Priya Ramani) के खिलाफ दायर मानहानि याचिका के मामले में शनिवार को उनसे पूछा कि क्या दोनों के बीच समझौते की कोई गुंजाइश है? रमानी ने आरोप लगाया था कि अकबर ने बीस साल पहले पत्रकार रहने के दौरान उनका यौन उत्पीड़न किया था. अकबर ने इन आरोपों का खंडन करते हुए रमानी के खिलाफ कथित मानहानि की शिकायत दर्ज करवाई थी.

भारत में ‘मी टू’ अभियान के जोर पकड़ने के दौरान साल 2018 में अकबर पर लगाए आरोपों के बारे में रमानी ने कहा था कि ये उनकी सच्चाई है और लोकहित के लिहाज से वह उन्हें सामने लाई हैं. वहीं, अकबर ने कोर्ट में दी गई अर्जी में कहा था कि उनकी छवि खराब करने के लिए रमानी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठी कहानी का सहारा लिया है. पत्रकार से नेता बने अकबर ने ऐसे आरोपों के चलते पिछले साल 17 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था.

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (ACMM) रवींद्र कुमार पांडेय ने शनिवार को मामले में आखिरी दलीलें सुनना शुरू किया और तब यह सवाल पूछा कि क्या दोनों के बीच समझौते की कोई गुंजाइश बची है. दरअसल, उनके पहले जो न्यायाधीश इस मामले में सुनवाई कर रहे थे, उनका बुधवार को दूसरी अदालत में ट्रांसफर हो गया है.

राउज एवेन्यू जिला अदालत में विशेष सांसद/विधायक अदालत के जज विशाल पाहूजा का ट्रांसफर कर उन्हें कड़कड़डूमा जिला कोर्ट में सीनियर दीवानी जज सह रेंट नियंत्रक के पद पर भेजा गया है. इसलिए रवींद्र पांडेय मामले में नए सिरे से आखिरी दलीलें सुन रहे हैं. मुकदमे की सुनवाई अंतिम चरण में है. अदालत ने दोनों पक्षों से समझौते के पॉइंट पर अपने जवाब 24 नवंबर को सुनवाई की अगली तारीख तक देने को कहा है.

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