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मजाकिया अंदाज में कर दी पूर्व सीएम ने की सीएम की तारीफ

देहरादून, उत्तराखंड जाट महासभा के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पूरे रंग में दिखे। उन्होंने मजाकिया लहजे में मुख्यमंत्री पर तंज भी कसे और उनकी तारीफ भी कर डाली।

उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा कि हम दोनों ‘रावत’ जाट जैसे कड़क हैं, लेकिन अंतर सिर्फ इतना है कि मेरा नाम छह अक्षरों का है और मुख्यमंत्री का नाम साढ़े नौ अक्षरों का है। इसलिए वह ज्यादा कड़क हैं।

हरीश रावत यहीं नहीं रुके उन्होंने हंसते हुए कहा कि त्रिवेंद्र जी चुप रहते हुए लोगों को ‘गड्डी’ कर देने में माहिर हैं। मुख्यमंत्री के साथ मंचासीन विधायक विनोद चमोली की ओर इशारा करते हुए हरीश रावत ने कहा कि चमोली जी इसकी गणना करने में माहिर हैं।

हरीश रावत के ऐसे कहते ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जोर का ठहाका लगाया। बोले, जाट महासभा के सामने आज प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत मौजूद है, इसलिए जो भी आपकी मांग होगी, वह पूरी हो जाएगी। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने हंसते हुए कहा कि कुछ घोषणा आप भी कर दो। इस पर हरीश रावत ने तुरंत जवाब दिया, भाई हम तो केवल ताली बजाने वालों में हैं।

उनकी बात सुनकर मुख्यमंत्री हंसी नहीं रोक पाए। हरीश रावत ने फिर से तंज कसते हुए कहा कि देखना रावत जी ताली बताते-बजाते कहीं हमें खड़ताल न बजानी पड़ जाए। उनकी यह बात सुनकर एक बार फिर से सभा में लोगों ने ठहाके लगाए।

कारगी चौक के समीप हरिद्वार बाईपास पर उत्तराखंड जाट महासभा के भवन के शिलान्यास मौके पर सभा ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह समेत कई गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया था।

इस दौरान हरीश रावत को मंच पर संबोधित के लिए आमंत्रित किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पूरे संबोधन में मजाकिया लहजे में खूब सियासी तंज कसे।

हरीश रावत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व जाट नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह के बारे में भी उनका परिचय देते हुए तंज कसा और कहा कि चौधरी साहब और मेरा करीब चार दशकों का साथ रहा है। वह अच्छे इंसान हैं, लेकिन अब वह जिस पार्टी में हैं, वह अच्छी नहीं है।

हरीश रावत के यह कहते ही चौधरी वीरेंद्र सिंह भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। संबोधन पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खड़े होकर हरीश रावत से गर्मजोशी से हाथ मिलाया और दोनों नेताओं ने कुछ कहते हुए फिर से जोर का ठहाका लगाया।

हालांकि चौधरी वीरेंद्र सिंह के संबोधन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कार्यक्रम से जाने लगे तो वीरेंद्र चौधरी ने भी अपने पुराने संबंधों को हवाला देना शुरू कर दिया।

इस पर हरीश रावत किनारे वाली कुर्सी पर कुछ देर के लिए हंसते हुए बैठे रहे। वह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के संबोधन से पहले चले गए।

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