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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दी पहाड़ी व्यंजन डुबका-भात के साथ ही भटवाणी की दावत 

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने अपने निवास ओल्ड मसूरी रोड देहरादून में उत्तराखंडी व्यंजनों की दावत दी। खास बात ये रही की उन्होंने मात्र 21 लोगों को ही आमंत्रित किया था, लेकिन फिर भी काफी संख्या में लोग पहुंचे और पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ उठाया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धर्मपत्नी रेणुका रावत और बेटी अनुपमा रावत ने अपने हाथों से लोगों को भोजन कराया।

पूर्व सीएम हरीश रावत दावत को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। इस बार उन्होंने पहाड़ी व्यंजन डुबका-भात के साथ ही भटवाणी, भांग की चटनी, गुड़ और लवण की दावत दी। इस दौरान हरदा ने कहा है कि अब गहत के डुबके का सीजन आ गया है और इन गहत के डुबकों में गडेरी डाल दो तो फिर स्वाद का क्या कहना और अगर डुबके रेणुका के हाथ के बने हों तो फिर इनका स्वाद ही कुछ और होगा। हरदा ने पारंपरिक व्यंजनों की दावत का जिक्र करते हुए कहा कि वह इस दावत में सिर्फ सीमित लोगों को निमंत्रण दिया था।

पूर्व सीएम ने अपने सोशल मीडिया में कहा था कि मोबाइल पर पहले संपर्क करने वाले 21 मित्रों को ही डुबके भात खिलाए जाएंगे। बता दें हरदा इससे पहले भी कभी ककड़ी पार्टी तो कभी नींबू और कभी आम पार्टी देकर चर्चा में रहे हैं। अक्सर पहाड़ी उत्पादों की ब्रांडिंग करने वाले हरदा अब तक काफल पार्टी सहित कई पहाड़ी व्यंजनों की दावत के कार्यक्रम कर लोगों को एकजुट करने का कार्य करते रहे हैं। इसके साथ ही ऐसे कार्यक्रमों से सुर्खियों में भी रहते हैं।

रावत का कहना है कि इन पहाड़ी व्यंजनों की दावत देने का मेरा उदेश्य इन व्यंजनों को बढ़ावा देना है, जिससे इनकी पौष्टिकता, गुण व इनकी अनेक विशेषताओं से नयी पीढ़ी भी अवगत हो सके और इसकी मांग बढ़ने से किसानों को उनके उत्पाद का और अधिक मूल्य मिल सके। इससे ये लोग खेती छोड़ने की बजाए खेती करने लगेंगे। हरदा ने ये भी कहा कि जब वह केंद्र में कृषि मंत्री थे, तब विश्व स्वस्थ संगठन (WHO) के समक्ष मंडवा और झंगोरा की पौष्टिकता को प्रमाणित करने का अनुरोध किया गया था।

उत्तराखंडियत की पहचान को हमेशा करता रहूंगा काम  

उन्हें खुशी है की विश्व स्वस्थ संगठन ने झंगोरा व मंडवे को पौष्टिक वैल्यू का उत्पाद मान लिया है। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी सरकार में रहते हुए सैकड़ों छोटी-छोटी पहल की थी, जिससे हमारी उत्तराखंडियत, खेती, किसानी, व्यंजन, परिधान और शिल्प का परचलन बढ़ने के साथ-साथ लोगों की आर्थिकी बढ़े और आम आदमी की आर्थिकी में सुधार हो। मैं उत्तरखंडियत की पहचान बनाने के लिए काम करता रहूंगा।

इस अवसर पर पूर्व विधायक गणेश गोदियाल, प्रभु लाल बहुगुणा, सतपाल ब्रह्मचारी, नंदन सिंह बिष्ट, विनोद चौहान, शांति रावत, आशा बिष्ट, राजपाल सिंह, दिनेश चौहान, मनीष कर्णवाल, आदित्य राणा, अभिषेक भंडारी, दीपक बुटोला, लखपत बुटोला, सतेंद्र सिंह पंवार आदि उपस्थित रहे।

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