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फसलों को बर्बाद होने से रोकेगा वन महकमा

रामनगर : वन महकमे के लिए चुनौती बनते जा रहे मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने को कवायद शुरू हो गई है। मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड की पहल पर तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने के लिए 80 गाव चिन्हित किए है। इन गाव में वन्य जीवों को रोकने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभिन्न बिंदुओं के तहत विस्तृत जानकारी मांगी गई है। तथ्य सामने आने के बाद उसके अनुरूप बचाव के तरीकों पर अमल किया जाएगा।

हमला बढ़ने के साथ ही फसलों का हो रहा नुकसान

वन्य जीव ग्रामीणों पर हमला करने के साथ ही फसल भी बर्बाद कर रहे हैं। गुलदार, बाघ, सुअर, तेंदुआ, भालू जैसे जानवरों के हमले और फसलों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें अक्सर देखने को मिलती हैं। शासन स्तर से सभी डीएफओ को पत्र भेजकर इस पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। डीएफओ ने सभी रेजों से इस संबंध में जानकारी मागी गई है। जनवरी अंत तक रिपोर्ट तैयार कर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को भेज दी जाएगी। डीएफओ हिमाशु बागरी ने बताया कि मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने के लिए करीब 80 गाव चिन्हित किए गए है। उसमें आगामी तीन वर्षो में इस पर कार्य किया जाएगा।

जहां सबसे ज्यादा परेशानी है, पहले उन गाव को प्राथमिकता दी जाएगी। इन बिंदुओं पर जुटाए तथ्य मानव वन्य जीव संघर्ष वाले नजदीकी गांव कौन से हैं। उन गांव में सबसे ज्यादा परेशानी किस वन्य जीव से है। वन्य जीवों को रोकने के लिए किस गांव में क्या उपाय हो सकते हैं। किस गाव में कितने बजट की जरूरत है। उस गांव का इतिहास व भौगोलिक स्थिति क्या है।

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