नेतागिरी

कोठियाल के लिए AAP पार्टी ने गंगोत्री विधानसभा में पोस्टरबाजी से झोंकी ताकत

उत्तरकाशीः आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने गंगोत्री विधानसभा सीट में दभं भरना शुरू कर दिया है. साथ ही अपने चेहरों के साथ चुनावी शंखनाद शुरू कर दिया है. गंगोत्री विधानसभा सीट से जहां कांग्रेस में चेहरा पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण के रूप में क्लियर है तो वहीं बीजेपी में अभी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है. जबकि, आम आदमी पार्टी ने सीधे मुख्यमंत्री के चेहरे के साथ चुनावी अभियान शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं आप ने शहर को कर्नल अजय कोठियाल के पोस्टरों से पाट दिया है.

बता दें कि आम आदमी पार्टी ने कर्नल अजय कोठियाल को गंगोत्री विधानसभा (Ajay Kothiyal Contest Election From Gangotri) से चुनाव मैदान में उतारा है. आम आदमी पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पुष्पा चौहान ने कहा कि आप इस बार विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election 2022) में प्रदेश की 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. जिसमें से मिथक सीट गंगोत्री विधानसभा से आप ने रि. कर्नल अजय कोठियाल (Col Ajay Kothiyal) के नाम पर मोहर लगा दी है. जो कि आम आदमी पार्टी की ओर से प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा हैं. 

पुष्पा चौहान बताया कि गंगोत्री विधानसभा में आम आदमी पार्टी (AAP Uttarakhand) को अथाह समर्थन मिल रहा है. क्योंकि, आज भी उत्तराखंड में सपनों के अनुसार प्रदेश नहीं मिल पाया है. इसलिए आम आदमी पार्टी प्रदेश में बदलाव का पर्याय बनेगी. मुख्यमंत्री के चेहरे को जिताने के लिए गंगोत्री विधानसभा में विशेष रणनीति तैयार (Aam Aadmi Party started Election campaign) की है. जिसके लिए गंगोत्री विधानसभा में 7 मंडल, 27 सेक्टर में बांटे गए हैं. इसके साथ ही जन अभियान के तहत आप के कार्यकर्ता चार काम हर व्यक्ति तक पहुंचा रहे हैं. साथ ही बूथों को मजबूत किया गया है.

उत्तराखंड की सत्ता से गंगोत्री विधानसभा का दिलचस्प संयोगः उत्तराखंड के चुनावी इतिहास में गंगोत्री सीट से जिस भी पार्टी का उम्मीदवार जीता, प्रदेश में उसी दल की सरकार बनी है. सियासत के इस संयोग को धर्मगुरु मां गंगा की असीम कृपा मानते हैं. उत्तरकाशी जिले की इस सीट को लेकर चाहे संयोग मानें या चमत्कार, लेकिन हकीकत यही है कि जिस भी दल का प्रत्याशी उत्तरकाशी से जीता प्रदेश में उसकी ही सरकार बनी है.

70 साल से बकरार है गंगोत्री सीट का मिथक: गंगोत्री विधानसभा सीट से जुड़े इस मिथक को एक मात्र संयोग कहें या कुछ और मगर यह सच है. देश की आजाद के बाद शुरू हुए विधानसभा चुनाव से ही इस मिथक की शुरुआत हुई, जो आज तक नहीं टूटा है. इस बात को करीब 70 साल हो गए हैं. तब से ही यह मिथक (Myth on Gangotri assembly seat) बरकरार है. उत्तराखंड राज्य गठन से पहले गंगोत्री विधानसभा सीट न होकर उत्तरकाशी विधानसभा सीट हुआ करती थी. उस दौरान भी यह मिथक बरकरार था. इस मिथक के बरकरार होने का सिलसिला अभी भी जारी है.

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