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गोरखपुर में पांच सौ हिस्ट्रीशीटरों ने अपराध की डगर छोड़कर शुरू की खेती किसानी

गोरखपुर : इसे बदलाव कहें या पुलिस का दबदबा, सिकरीगंज के हिस्ट्रीशीटर खदेरू बेलदार पिछले पांच वर्षों से बटइया पर खेती करने लगे हैं। इससे उनकी व उनके परिवार की जीविका चलती है। वह सिकरीगंज के शिवपुर में ही दुर्गा मंदिर बनवाकर रहते हैं। पिछले तीन वर्षों से किसी अपराध में उनका नाम नहीं आया। सिकरीगंज पुलिस ने खदेरू को निष्क्रिय तो घोषित कर दिया है, लेकिन वह उनकी गतिविधियों पर नजर भी रखती है।

साइकिल लूटकर बने थे अपराधी, अब कर रहे खेती

लोग बताते हैं कुछ वर्ष पूर्व तक लोग खदेरू से मिलने तक में भय खाते थे, लेकिन उनके बदले स्वभाव के चलते आज गांव के लोगों से उनके अच्छे संबंध हैं। खदेरू खुद ही बताते हैं कि उन्होंने 15 वर्ष की आयु में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था। पहली बार महदेवा बाजार में वह साइकिल लूटकर भाग रहा था। ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया था और मारपीट कर पुलिस को सौंप दिया था। उसके बाद कई अपराधों में खदेरू का नाम सामने आया, लेकिन पिछले कुछ वर्षों ने उनकी पहचान ही बदल दी है। वह खेती किसानी करके सुकून के साथ घर पर रहते हैं। खदेरू की ही भांति हिस्ट्रीशीटर व सिकरीगंज के बारीगांव निवासी जयराम सिंह भी खेती-किसानी करके परिवार की जीविका चलाते हैं। वह पशुपालन से भी जुड़े हुए हैं।

मारपीट, लूट का था आरोप

जयराम सिंह ने वर्ष 1968 में हाईस्कूल पास किया था और 1972 से ही मारपीट, लूट आदि मामलों में इनका नाम सामने आने लगा था। शुरुआती दिनों में ही इन्हें पुलिस पकड़ने गई तो इन्होंने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। बाद में पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। जयराम सिंह बताते हैं कि वह वर्ष 1983 से सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। चिलुआताल के हिस्ट्रीशीटर भी फूलचंद्र भी पिछले चार वर्षों से सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वह चिलुआताल स्थित आरओ प्लांट पर काम करते हैं और टेंपो चलाकर परिवार की जीविका चलाते हैं। फूलचंद्र कहते हैं कि 20 वर्ष पूर्व उनके गांव के पास मालगाड़ी में चोरी व लूट हो जाती थी। साजिशन उन पर मुकदमें दर्ज होते रहे और उन्हें थाने से हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिया।

उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्ष से उन पर कोई मुकदमा नहीं हैं। चार वर्ष पहले गांव के एक व्यक्ति से खेत में जानवर चले जाने के कारण उनका विवाद हो गया था। इससे उनके विरुद्ध शांतिभंग की कार्रवाई हुई थी, लेकिन उसके बाद कभी अपराधिक मामलों में उनका नाम नहीं आया। जिले के निष्क्रिय हिस्ट्रीशीटर की सूची में सिर्फ खदेरू, जयराम व फूलचंद्र भर नहीं शामिल हैं। जिले में निष्क्रिय हिस्ट्रीशीटरों की संख्या 546 हैं। इसमें से 81 निष्क्रिय हिस्ट्रीशीटर ऐसे हैं, जिनके विरुद्ध पिछले तीन वर्षों में कोई मुकदमा नहीं पंजीकृत हुआ है। इसमें से कुछ अपने दूसरे काम धंधे में लग गए हैं तो कुछ अपनी बढ़ती अवस्था व बीमारी के चलते कोई काम धंधा तो नहीं शुरू किया, लेकिन पिछले तीन वर्षों में किसी अपराध में उनका नाम भी सामने नहीं आया है।

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