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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण का दस्तावेज पेश किया

GDP में 7.3 प्रतिशत की गिरावट 
समीक्षा 2021-22 में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति के साथ ही वृद्धि में तेजी लाने के लिए किए जाने वाले सुधारों का ब्योरा दिया गया है. वित्त वर्ष 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी. आर्थिक समीक्षा भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए आपूर्ति-पक्ष के मुद्दों पर केंद्रित है.

वास्तविक GDP ग्रोथ 9.2 प्रतिशत होने की उम्मीद

-आर्थिक सर्वेक्षण में अलग-अलग सेक्टर ने बीते साल कैसा प्रदर्शन किया, इस बारे में भी विस्तार से बताया गया है.
-अग्रिम अनुमान बताते हैं कि 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था का वास्तविक जीडीपी विस्तार 9.2 प्रतिशत होने की उम्मीद है. कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियां कोविड महामारी के पूर्व और बाद के स्तर से आगे निकल गई हैं.
-महामारी से कृषि और संबद्ध क्षेत्र सबसे कम प्रभावित हुए हैं और पिछले वर्ष में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि के बाद इस क्षेत्र के 2021-22 में 3.9 प्रतिशत से बढ़ने की उम्मीद है.

2022-23 में 8 प्रतिशत से 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान
कल (1 फरवरी को) केंद्रीय बजट पेश करने से पहले सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण का दस्तावेज पेश किया. आर्थिक सर्वेक्षण में 2022-23 में 8 प्रतिशत से 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया है.

 2022 में 9.2% रही GDP ग्रोथ, सर्विस सेक्टर को कोविड से ज्यादा नुकसान

कल (1 फरवरी को) केंद्रीय बजट पेश करने से पहले सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण का दस्तावेज पेश किया. आर्थिक सर्वेक्षण में 2022-23 में 8 प्रतिशत से 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया है. 

2022 के लिए GDP Forecast 9-9.5% के बीच रहने की संभावना

CNBC-TV18 के सूत्रों ने बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण 2022 में वित्त वर्ष 22 के सकल घरेलू उत्पाद के पूर्वानुमान (GDP forecast) को 9 प्रतिशत से 9.5 प्रतिशत के बीच रखने की संभावना है. उन्होंने कहा कि यह वित्त वर्ष 2023 के सकल घरेलू उत्पाद को 9 प्रतिशत के आसपास पेश करने की भी संभावना है. सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति के जोखिमों और खपत-आधारित विकास की आवश्यकता पर भी जोरदार संकेत मिलने की उम्मीद है, जो कोविड-19 से पहले भी नीति निर्माताओं के लिए प्रमुख सिरदर्द बन गए थे.

डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकॉनमी

संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकॉनमी के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के UPI प्लेटफॉर्म की सफलता के लिए मैं सरकार के विज़न की प्रशंसा करूंगा. दिसबंर 2021 में देश में 8 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा का लेन-देन UPI के माध्यम से हुआ है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा- मेरी सरकार की नीतियों की वजह से आज भारत उन देशों में है जहां इंटरनेट की कीमत सबसे कम है तथा स्मार्टफोन की कीमत भी सबसे कम है. इसका बहुत बड़ा लाभ भारत की नौजवान पीढ़ी को मिल रहा है.

नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई

नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों में विकास के काम जारी हैं. वहां बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिसमें रेल लाइन भी शामिल है. जम्मू कश्मीर के लोगों को भी रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं.
देश में नेशनल हाईवे की लंबाई बढ़कर अब 1 लाख 40 हजार किलोमीटर हो चुकी है. ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पूरा होने के करीब है. जो देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा.

छोटे उद्योगों को मिली मदद 

कोरोना काल के बाद सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के लिए 3 लाख करोड़ के कोलेट्रल फ्री लोन की व्यवस्था की गई थी. इस गारंटी को बाद में 4 लाख करोड़ किया जा चुका है. इससे छोटे उद्योगों को आगे बढ़ने में मदद मिल रही है. खादी की सफलता सबको दिख रही है. खादी की बिक्री देश में तीन गुना बढ़ी है.

1900 से अधिक किसान रेल चलाई गईं

किसानों से भी रिकॉर्ड खरीदी गई है. किसानों की आय के नए जरिए तैयार किए जा रहे हैं. कृषि से जुड़े निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. किसान रेल से किसानों को फायदा  हुआ. कोरोना काल में 1900 से ज्यादा किसान रेल चली. कोविंद बोले- यह दिखाता है कि सोच नई हो तो पुराने संसाधन भी काम आ सकते हैं. छोटे किसानों (कुल के 80 फीसदी) के हितों को सरकार ने प्रमुख तौर पर रखा है. सरकार आर्गेनिक खेती जैसे प्रयास भी कर रही है. सरकार बारिश के जल को बचाने के लिए भी कदम उठा रही है. अटल भू जल योजना से 64 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित की गई है.

युवाओं को रोजगार के लिए PLI स्कीम

मेरी सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मौजूद संभावनाओं को साकार करने और युवाओं को अवसर देने के लिए 14 महत्वपूर्ण पीएलआई स्कीम शुरू की हैं. यह स्कीमें भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगी, बल्कि रोजगार के अधिक अवसर भी उपलब्ध कराएंगी.

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