देश/प्रदेश

नचिकेता ताल, हरुंता बुग्याल व चौरंगीखाल पर्यटन स्थल में सुविधाओं को घोर अकाल

जिला मुख्यालय के निकटवर्ती नचिकेता ताल और हरुंता बुग्याल के पहुंच मार्ग पर स्थित सर्दियों में बर्फ से लकदक रहने वाला चौरंगीखाल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की बाट जोह रहा है।

उत्तरकाशी से केदारनाथ यात्रा मार्ग पर महज 27 किमी दूरी पर स्थित चौरंगीखाल नचिकेता ताल, हरुंता बुग्याल, सेम नागराजा, नागणी ठांग आदि पर्यटन स्थलों का प्रमुख पड़ाव है। दशकों से यहां पर्यटकों की आवाजाही है, लेकिन अभी तक यहां पर्यटकों के लिए ढांचागत सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है। क्षेत्र के चौंदियाटगांव, सौंदी, फोल्ड, दिखोली, सौड़ आदि गांवों के लोगों ने यहां कच्ची दुकानें बनाकर ढाबे खोले हुए हैं। चौंदियाटगांव के बलवीर सिंह बताते हैं कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से यहां ढाबा चला रहा हैं।

वर्ष 1950 में उनके दादा जयराम सिंह, उनके बाद पिता इंद्र सिंह और अब वे स्वयं अपने भाई राकेश के साथ यहां ढाबा चला रहे हैं। फोल्ड के बिजेंद्र सिंह, सौड़ के नैन सिंह बिष्ट, दशरथ सिंह, सौंदी के लक्ष्मी प्रसाद आदि का कहना है कि यहां पहुंचने वाले पर्यटक ठहरना भी चाहते हैं, लेकिन वन विभाग इन लोगों को पर्यटकों के ठहराव लायक पक्के निर्माण की अनुमति नहीं दे रहा है।

चौरंगीखाल में तीन पीढ़ियों से लोग ढाबे चला रहे हैं, लेकिन इन्होंने कभी वनवासी अधिकार कानून का फायदा उठाने की कोशिश नहीं की। कब्जा साबित कर अपने निर्माणों को नियमित करने के लिए विधिवत वन कानून की प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है।
ओम प्रकाश मंदवाल, वन क्षेत्राधिकारी मुखेम रेंज उत्तरकाशी।

विशेष