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एक साल के बाद भी प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट जन औषधि केंद्र मुख्यालय में नहीं खुल पाया

बागेश्वर: उद्घाटन के एक साल से अधिक बीत जाने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट जन औषधि केंद्र मुख्यालय में नहीं खुल पाया है। यह केंद्र कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गया। भाजपा के दोनों विधायकों व जिलाधिकारी के मामला संज्ञान में होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। यह लोग सरकारी योजनाओं को धरातल पर पहुंचाने में पूरी तरह असफल साबित हो गए हैं। बीते छह जनवरी 2019 को जब इस जन औषधि केंद्र का उद्घाटन हुआ था तो बड़े-बड़े दावे किए गए थे। इसके संचालन की जिम्मेदारी रेडक्रास को दी गई थी। लेकिन कुछ समय बाद ही यहां पर ताला लग गया। जिससे यहां आने वाले मरीजों को महंगी दवाईयां लेने को मजबूर होना पड़ा।

जब डीएम और विधायक सब लोग इस केंद्र को फिर से सुचारु करने में असफल हो गए तो पूरे मामले की पड़ताल की गई। तब जाकर इसका खुलासा हुआ। असल में मामला कमीशनखोरी का है। हल्द्वानी में जनऔषधि केंद्र के एक सप्लायर ने बताया कि मामला दस प्रतिशत कमीशन का है। जिसकी वजह से यह बंद हो गया है। अब दिक्कत यह हो रही थी जन औषधि केंद्र का संचालन तो रेडक्रॉस कर रहा था। फिर कैसे कमीशन मिलेगा। तो अलग से कमीशन का खेल खेला गया। सप्लायर ने साफ मना कर दिया। उसका कहना था कि काम नंबर दो का है तो ये सब नहीं कर पाएंगे। जिस कारण आज तक यह केंद्र नहीं खुल पाया है। इन सब के बीच गरीब जनता पिस रही है। उसे जो गोली एक रुपये में मिल जानी चाहिए थी। बाजार से 10 रुपये में खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।

51 हजार की दवाइयां हुई एक्सपायर

बागेश्वर: जनता के पैसे का जमकर दुरुपयोग जनऔषधि केंद्र में हो रहा है। बंद पड़े केंद्र में 51 हजार की दवाइयां एक्सपायर हो गई है। हाल यह है कि जनऔषधि केंद्र एक साल बाद भी नहीं खुला और 20 हजार की दवाइयां और मंगा दी गई है। मिलीभगत से लूटने को खेल खेला जा रहा है। लेकिन सब मूकदर्शक बने हुए हैं।

 

-सोसाइटी के कुछ लेन-देन का बकाया है। अभी बैठक भी हुई थी। उम्मीद है जल्द ही केंद्र खुल जाएगा।

-चंदन राम दास, विधायक, बागेश्वर

 

बैठक में जनऔषधि केंद्र पर भी बातचीत हुई है। अगर जल्द सोसाइटी इसका संचालन नहीं करती तो कार्रवाई की जाएगी। सख्त निर्देश दिए गए हैं।

-रंजना राजगुरु, जिलाधिकारी, बागेश्वर

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