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अवैध खनन में एसओ रायपुर समेत पूरी चौकी लाइन हाजिर

देहरादून,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरुण मोहन जोशी ने अवैध खनन में प्रभावी कार्रवाई नहीं करने पर एसओ रायपुर समेत मालदेवता चौकी के पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं पुलिस ने देर रात मालदेवता में चेकिंग कर अवैध खनन में छह डंपर सीज किए हैं।

एसएसपी अरुण मोहन जोशी को मालदेवता के समीप नदी में अवैध खनन होने की सूचना मिली। रात के समय मिली सूचना पर उन्होंने डालनवाला सीओ विवेक कुमार और एसएसआइ पंकज देवराड़ी के नेतृत्व में टीम को जांच के निर्देश दिए। टीम रात में करीब बारह बजे मालदेवता पहुंची तो देखा कि पुलिस चेकिंग नहीं कर रही है। बिना चेकिंग के ही वाहन धड़ल्ले से आवाजाही कर रहे हैं।

फिर टीम मालदेवता लाल पुल के पास पहुंची तो देखा कि रायपुर की ओर से रेता बजरी से भरे हुए डंपर आ रहे हैं। टीम ने जब डंपरों की चेकिंग की तो छह में से चार ने रवन्ने दिखाए। सीओ ने जांच की तो पाया कि उपरोक्त रवन्ने टिहरी में स्वीकृत एक खनन पट्टे के हैं। वहां के रवन्नों की आड़ में यहां खनन हो रहा है। इनमें भी ओवरलोड माल है, जबकि दो डंपरों के पास रवन्ने ही नहीं थे।

इस पर टीम छह डंपरों को मालदेवता चौकी ले आई और सीज कर दिया। साथ ही इस प्रकरण की सूचना एसएसपी को दी। सूचना पर तड़के करीब तीन बजे एसएसपी मौके पर पहुंचे और पूरी जानकारी ली।

एसएसपी ने अवैध खनन पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने तत्काल प्रभाव से रायपुर थाना एसओ देवेंद्र सिंह चौहान, मालदेवता चौकी में तैनात सिपाही सुरेंद्र खंतवाल, नरेश लेखपाल, राकेश डिमरी, मनमोहन सिंह असवाल और महिला कांस्टेबिल नमिता रावत को लाइन हाजिर कर दिया।

एसएसपी ने बताया कि जिले में अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि पुलिस ने इसमें हीलाहवाली की तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होगी।

अवैध खनन माफिया को संरक्षण देने में एक बार फिर खाकी पर दाग लग गया। जनपद का शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, हर जगह खनन माफिया पुलिस पर हावी दिख रहा।

खनन के इस खेल में पुलिस खुद खनन-मार्ग का ख्याल रखकर खनन वाहनों को सुरक्षा प्रदान कर रही। इसका खुलासा खुद पुलिस कप्तान अरुण मोहन जोशी के छापे के वक्त हुआ, जब उन्होंने रायपुर पुलिस को इसमें संलिप्त पाया। थाना पुलिस के विरुद्ध हुई कार्रवाई से न केवल पुलिस में हड़कंप है, बल्कि माफिया भी सहमा दिख रहा।

विकासनगर में बीते दिनों खनन माफिया द्वारा दरोगा पर टै्रक्टर चढ़ाने की वारदात के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुलिस कप्तान अरुण मोहन जोशी को माफिया के खिलाफ सख कार्रवाई के निर्देश दिए। यही नहीं मुख्यमंत्री ने यह भी का कि किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव कार्रवाई में आड़े नहीं आएगा।

इसके बाद पुलिस कप्तान की ओर से सभी थानेदारों और चौकी प्रभारियों को अवैध खनन रोकने के आदेश दिए गए, लेकिन कुछ थानेदार इसे हल्के में लेते रहे।

रायपुर पुलिस इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सूत्र बता रहे कि रायपुर पुलिस की माफिया संग सांठगांठ की सूचना पुलिस कप्तान तक गई थी।

यही वजह है कि कप्तान ने तड़के तीन बजे निरीक्षण किया और शिकायत के सही मिलने पर संबंधित थानेदार व पूरी चौकी के विरुद्ध कार्रवाई की। कप्तान की कार्रवाई तो सराहनीय रही, लेकिन थाना पुलिस व खनन माफिया से सांठगांठ ने सवाल जरूर खड़े कर दिए।

ऐसा पहली बार नहीं है जब पुलिस पर ऐसे आरोप लगे हों। दो साल पूर्व सितंबर 2017 में यह खुलासा हुआ था कि पुलिस खुद खनन-मार्ग का ख्याल रखती है और खनन वाहनों को सुरक्षा प्रदान कर रही है। इसमें विकासनगर थाने की कुल्हाल चौकी पुलिस सस्पेंड हुई और एक हफ्ते के बाद रायपुर के निरीक्षक, एक दरोगा समेत चार पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी।

इतना ही नहीं मार्च-2017 में विकासनगर थाना क्षेत्र की हरबर्टपुर पुलिस चौकी की गिरफ्त से खनन माफिया पांच सीज डंपर चौकी के बाहर से खुलेआम छुड़ा ले गए थे। मामला जमकर उछला लेकिन पुलिस अधिकारी मौन साधे रहे। इसके बावजूद खाकी और माफिया की सांठगांठ कम नहीं हुई।

अवैध खनन को लेकर विकासनगर, कैंट, राजपुर, वसंत विहार, सहसपुर, डोईवाला, रायपुर व ऋषिकेश थाना पुलिस लगातार सवालों में रहती है। ताजा मामले में रायपुर पुलिस की कार्यप्रणाली ने एक बार फिर से खाकी पर दाग लगा दिया है। ये अलग बात है कि थाना प्रभारी व पूरी चौकी को लाइन हाजिर कर एसएसपी ने जनपद पुलिस को चेतावनी दे दी, लेकिन चेतावनी कितनी कारगर होगी यह वक्त ही बताएगा।

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